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Ahilya Rupen Sanstithta
₹120.00 ₹105.00



₹120.00 ₹105.00
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Author: Sadhna Balvate
Pages: 110
Year: 2025
Binding: Paperback
ISBN: 9789367192689
Language: Hindi
Publisher: National Book Trust
अहिल्या रूपेण संस्थिता
प्रस्तुत नाटक देवी अहिल्याबाई के जीवन की प्रमुख घटनाओं पर आधारित है। अहिल्याबाई का संपूर्ण जीवन न्यायप्रियता, सङ्घरित्रता, संस्कार, धर्म और अनुशासन के स्तंभों पर मजबूती से खड़ा है। प्रजावत्सल देवी अहिल्याबाई होलकर पूरे मालवा की मातुश्री कहलाई। उनके राज्य में न केवल मनुष्य वरन् पशु-पक्षी भी न्याय के अधिकारी थे। एक सहृदय स्त्री होने के साथ ही वे एक कुशल शासक भी रहीं। कुल मिलाकर इस नाटक में अहिल्याबाई के जीवन के सभी पहलुओं को दिखाने का प्रयास किया गया है।
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| Binding | Paperback |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2025 |
| Pulisher |
डॉ. साधना बलवटे ने हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर की परीक्षा उत्तीर्ण की तथा ‘शरद जोशी का व्यंग्य साहित्यः एक अध्ययन’ विषय पर पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। मौलिक कृतियाँः शरद जोशी व्यंग्य के आर पार, नीर-क्षीर, प्रयत्नरत हूँ (गीत गज़ल संग्रह), न काहू से दोस्ती हमरा सबसे बैर (व्यंग्य संग्रह)। सम्मान/पुरस्कारः 10वें एवं 12वें विश्व हिंदी सम्मेलन फिजी एवं भोपाल में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व । सांस्कृतिक स्रोत प्रशिक्षण केंद्र, नई दिल्ली द्वारा प्रदत्त सीनियर फैलोशिप-2017-2018। भारत सरकार के गैस एवं पेट्रोलियम मंत्रालय की राजभाषा सलाहकार समिति की माननीय सदस्या, भारत सरकार के शहरी आवास मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति की माननीय सदस्या एवं राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के बोर्ड ऑफ ट्रस्टी की माननीय सदस्या।

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