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Author: Pragati Saxena
Pages: 200
Year: 2024
Binding: Paperback
ISBN: 9788119899647
Language: Hindi
Publisher: Setu Prakashan
चार आदिरूप
यह मनुष्य के स्वतन्त्र, यानी चेतन निर्णय पर निर्भर करता है कि यह भलाई भी कहीं किसी शैतानी बुराई में ना विकृत हो जाए। मनुष्य का सबसे बड़ा पाप अचेतनता है, जिससे वे लोग भी बहुत धार्मिकता और करुणा से बर्ताव करते हैं, जिन्हें मनुष्यता के लिए शिक्षक और उदाहरण होना चाहिए। हम कब इतने क्रूर तरीक़े से मानवता को लापरवाही से लेना बन्द करेंगे और गम्भीरता से मनुष्यता को इस पैशाचिक वश से मुक्त करने के तरीक़े और साधन ढूँढ़ेंगे, ताकि हम उसे इस अचेतना और हस्तक्षेप से बचा सकें और कब इसे सभ्यता का सबसे महत्त्वपूर्ण काम बनाएँगे ? क्या हम इतना भी नहीं समझ सकते कि ये सारे बाहरी सुधार और फेरबदल मनुष्य की भीतरी प्रकृति को छू भी नहीं पाते, और अन्तत: सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि सारे विज्ञान और तकनीक के साथ क्या मनुष्य ज़िम्मेदारी उठाने के लिए सक्षम है या नहीं ?
– इसी पुस्तक से
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2024 |
| Pulisher |
प्रगति सक्सेना
कवि, लेखक, पत्रकार, अनुवादक।
अँग्रेज़ी साहित्य में दिल्ली विश्वविद्यालय से एम.ए.। पत्रकारिता और जन संचार में गुरु जम्बेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से एम.ए.।
1987 से पत्रकारिता की प्रिण्ट से लेकर टीवी, रेडियो और डिजिटल तक। अनुवाद में शुरू से रुचि रही। ज्याँ जेने, रोबेर्तो आर्ल्ट, जे.एस. मिल, सलमान रश्दी, रस्किन बॉन्ड के उपन्यासों का हिन्दी अनुवाद। कुछ जर्मन और लातिन अमेरिकी कविताओं का भी अनुवाद किया।
पत्रकारिता और जन संचार पर अध्यापन किया। जनसत्ता से शुरुआत कर, ए.एन.आई. मेक्सिकन टीवी, बी.बी.सी., नेशनल हेराल्ड से गुज़रते हुए फिलवक्त ‘किसान तक’ (इण्डिया टुडे समूह) में कार्यरत।

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