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Corporate Media : Dalal Street
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Author: Dilip Mandal
Pages: 224
Year: 2022
Binding: Hardbound
ISBN: 9788126721115
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
कॉरपोरेट मीडिया : दलाल स्ट्रीट
भारतीय मीडिया का यह संकटकाल है। मीडिया के लिए यह सच से साक्षात्कार का भी समय है। लेकिन यह संकट मीडिया उद्योग का है। अगर आप मास मीडिया के कंज्यूमर यानी पाठक, श्रोता या दर्शक हैं तो इस बात पर अफसोस जताने की जगह खुश हो सकते हैं कि 2009 में इस देश में पेड न्यूज का घोटाला हुआ और 2010 में नीरा राडिया कांड। पेड न्यूज विवाद ने बताया था कि मीडिया कवरेज की पैकेज डील होती है। वहीं, नीरा राडिया कांड से पता चला कि देश और मीडिया को चलाने वाले कोई और हैं, जो राजनीति, नौकरशाही, न्याय व्यवस्था और मीडिया में मौजूद कठपुतलियों को नचा रहे हैं। कॉरपोरेट जगत के विश्वविजय अभियान का यह भारतीय संस्करण है। इस कहानी में रोमांच है, रहस्य है और इन सबसे बढ़कर इसमें भदेसपन कूट-कूटकर भरा है।
समाचार मीडिया का पब्लिक रिलेशन, कॉरपोरेट कम्युनिकेशन और लॉबिंग से गर्भनाल का संबंध है। मीडिया चौथा या पांचवां कोई भी खंभा नहीं, धंधा है। मीडिया मुनाफे से संचालित होता। मीडिया के स्वामित्व का समरूप कॉरपोरेट है और मीडिया का कंटेंट कुल मिलाकर सत्ता की संस्थाओं और शहरी हिंदू सवर्ण इलीट पुरुष के पक्ष में झुका हुआ है। मीडिया, कॉरपोरेट जगत और राजनीतिक संसार के लिए ये सारी बातें कभी रहस्य नहीं थीं। लेकिन इस सच को जगजाहिर होने के लिए किसी पेड न्यूज कांड या राडिया कांड की जरूरत थी। जो मीडिया सबकी छवि बनाने-बिगाड़ने का दम होने का दावा करता है और कभी शेयर तो कभी जमीन तो कभी राज्यसभा की सीट और कभी रुपए की शक्ल में फीस वसूलता है, वह अपनी ही छवि को बचाने में नाकाम रहा। 2009-2010 में मीडिया का अपना क्राइसिस मैनेजमेंट फेल हो गया। अब मीडिया नाम का राजा बच्चों-बूढ़ों सबके सामने नंगा खड़ा है। यह पुस्तक इसी दर्दनाक दास्तान को सामने लाने की कोशिश है, क्योंकि कुछ लोगों के लिए मीडिया अब भी एक पवित्र विचार है।
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2022 |
| Pulisher |
दिलीप मंडल
दिलीप मंडल पेशेवर संचारकर्मी हैं। देश के दस से अधिक प्रमुख मीडिया घरानों से लगभग दो दशक तक जुड़े रहे दिलीप मंडल वैकल्पिक मीडिया में लगातार प्रयोग कर रहे हैं। वे कॉलेज के दिनों में ही छात्र और मज़दूर आन्दोलनों से जुड़े और झारखंड अलग राज्य आन्दोलन में भी शरीक रहे। पत्रकारिता का विधिवत् प्रशिक्षण टाइम्स सेंटर फ़ॉर मीडिया स्टडीज से हासिल किया। ‘दैनिक जागरण’ के दिल्ली संस्करण के साथ सांस्थानिक पत्रकारिता की शुरुआत। इसके बाद ‘जनसत्ता’ के कोलकाता संस्करण, ‘इंडिया टुडे’, दैनिक ‘अमर उजाला’ और ‘इंटर प्रेस सर्विस’ से जुड़कर प्रिंट की पत्रकारिता की। सम्पादन से लेकर चुनाव और संसदीय रिपोर्टिंग तथा प्रिंट माध्यम में लगभग 10 साल का सफ़र।

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