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Dalit Kavita : Samkaleen Paridrashya
₹325.00 ₹285.00



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Author: Jaiprakash Kardam
Pages: 143
Year: 2018
Binding: Hardbound
ISBN: 9789386604675
Language: Hindi
Publisher: Aman Prakashan
दलित कविता : समकालीन परिदृश्य
हिन्दी दलित साहित्य आज एक मजबूत जमीन पर खड़ा है। यहाँ तक पहुँचने में उसने एक लंबी दूरी तय की है। इस दौरान बहुत सी उपलब्धियां और आयाम दलित साहित्य और साहित्यकारों ने हासिल किए हैं। वैदिक-पौराणिक काल से लेकर आधुनिक काल के प्रश्नों तक और वैचारिकी से लेकर कला तक, शालीनता से लेकर आक्रोश तक, अनेक प्रकार की विविधताएँ दलित साहित्य में देखी जा सकती हैं। चर्चित या नामचीन लेखकों की रचनाओं से दलित साहित्य का पाठक वर्ग परिचित रहा है। बहुत से अचर्चित और अनजान लेखकों ने भी महत्वपूर्ण काव्य रचनाओं का सृजन किया है। इस पुस्तक में कनिष्ठ/वरिष्ठ, चर्चित/अचर्चित सभी प्रकार के कवियों की रचनाओं पर सम्यक टिप्पणी करने की कोशिश की गई है, जिनके माध्यम से दलित साहित्य के विकास के साथ-साथ उसके द्वंद्व, समस्या, चुनौतियों और संभावनाओं को समझा जा सकता है। संभव है साहित्य के बहुत से पाठक इनमें से बहुत सी काव्य-पुस्तकों को न पढ़ सके हों और उनसे परिचित भी नहों, इस पुस्तक के माध्यम से वे उन पुस्तकों से भी परिचित हो सकेंगे और दलित कविता के समकालीन परिदृश्य से भी और अच्छी तरह से परिचित हो सकेंगे।
| Authors | |
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| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2018 |
| Pulisher |
जयप्रकाश कर्दम
जन्म : 05 जुलाई, 1958 को ग्राम-इन्दरगढी, हापुड़ रोड़, गाज़ियाबाद (उत्तर प्रदेश) में।
शिक्षा : एम.ए. (दर्शनशास्त्र, हिंदी, इतिहास),पी-एच.डी.(हिंदी)।
निवास : बी-634, डी.डी.ए फ्लेट्स (चित्रकूट कॉलोनी), ईस्ट ऑफ लोगी रोड़, दिल्ली – 110093।
साहित्य-सृजन : दो उपन्यास, एक बाल उपन्यास, दो कहानी संग्रह, तीन कविता संग्रह, एक खण्ड-काव्य, एक यात्रा वृतांत, एक साक्षात्कार, दस आलोचना/वैचारिक पुस्तकें, तीन सम्पादित, एक अनुदित और कुछ बाल साहित्य की पुस्तकें प्रकाशित|
सम्पादन : दलित साहित्य (वार्षिकी) का सन 1999 से संपादन।

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