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Description
एक औरत हिपेशिया भी थी
अक्ल की दुनिया में जिस कदर भी थी वो सब एक शख़्स में समाई थी एक औरत हिपेशिया भी थी। शक्ल महताब हुस्न की पहली जिससे दुनिया में रोशनी फैली। एक औरत हिपेशिया भी थी। अक्ल की वैसी दिल की भी वैसी उसको हर शख्स से थी हमदर्दी आप अपनी मिसाल थी वैसी एक औरत हिपेशिया भी थी। उसके क्या-क्या हुनर मैं गिनवाऊँ कम हैं जितना भी उसके गुन गाऊँ एक औरत हिपेशिया भी थी।`
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2005 |
| Pulisher |











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