Faisla

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Author: Pardeshiram Verma

Availability: 5 in stock

Pages: 152

Year: 2013

Binding: Hardbound

ISBN: 9789350008430

Language: Hindi

Publisher: Vani Prakashan

Description

फैसला

छत्तीसगढ़ अंचल के जीवन राग और अन्तःसंघर्ष को प्रतिबिम्बित करती परदेशीराम की हिन्दी कहानियाँ विषय और अनोखे कथाप्रसंगों के साथ ही सरल प्रस्तुति के कारण चर्चित हुईं। सतत विस्तार की ओर अग्रसर लाल गलियारे के कारण खौफ़जदा आदिवासियों की कहानियाँ इस संकलन को नया आयाम देती हैं।

साथ ही खण्डित होती आस्था और टूट रहे सामाजिक सम्बन्धों पर केन्द्रित इस संग्रह की कहानियाँ इस अंचल की सीमाओं का अतिक्रमण भी करती हैं। विकास की ओर अग्रसर देश और प्रदेश के लोग निजता और सुकून की क़ीमत पर मिल रही उपलब्धियों को अपनी हार और चन्द मुट्ठी भर विस्तारवादी लोगों की जीत की तरह स्वीकारने हेतु विवश हैं। आक्रामक एवं विस्तारवादी कारखानेदारों की संवेदनहीन उद्योग दृष्टि से संचालित योजनाओं ने गाँवों के आसमान को धुएँ और खेतों की धूल से ढँक सा दिया है। फिर भी मर-मर के जीते हुए और इस घेरेबन्दी से निकलकर साँस लेने में क़ामयाब ग्रामीणजन नयी पीढ़ी के लिए गाँवों को गाँव की तरह बचा लेने हेतु इन कहानियों में संकल्पित दिखते हैं। इस संग्रह की कहानियाँ समकालीन परिदृश्य को भयावह सर्पकाल के रूप में चित्रित करती हैं। ये कहानियाँ बताती हैं कि धर्म, जाति और स्थानीयता के नकली मसलों में उलझाकर मनुष्यता के पारम्परिक स्वरूप को विरूपित करने वाली ताकतें अब और अधिक प्रवीण, साधन सम्पन्न और मायावी हो गयी हैं। विलक्षण भाषा कौशल और दुर्लभ कथ्य के साथ ही प्रस्तुति में सादगी और सधाव संग्रह की कहानियों की विशेषता है।

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Authors

Binding

Hardbound

ISBN

Language

Hindi

Pages

Publishing Year

2013

Pulisher

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