Guru Nanak : Kaljayi Kavi Aur Unka Kavya

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Guru Nanak : Kaljayi Kavi Aur Unka Kavya

Guru Nanak : Kaljayi Kavi Aur Unka Kavya

185.00 140.00

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Author: Madhav Hada

Availability: 5 in stock

Pages: 128

Year: 2023

Binding: Paperback

ISBN: 9789393267351

Language: Hindi

Publisher: Rajpal and Sons

Description

गुरु नानक : कालजयी कवि और उनका काव्य

गागर में सागर की तरह इस पुस्तक में हिन्दी के कालजयी कवियों की विशाल काव्य-रचना में से श्रेष्ठतम और प्रतिनिधि काव्य का संकलन विस्तृत विवेचन के साथ प्रस्तुत है।

सिख धर्म की बुनियाद रखनेवाले, गुरु नानक (1469 ई. – 1539 ई.), मध्यकालीन संत भक्ति के सबसे असाधारण व्यक्तित्व हैं जिन्हें अक्सर ‘पवित्र आत्माओं का राजा’, ‘हिन्दुओं का गुरु’ और ‘मुसलमानों का पीर’ भी कहा जाता है। गुरु नानक की वाणी में कविता अनायास है और परमात्मा की एकता का विचार उनकी वाणी में सर्वोपरि है जिसे वे अलग-अलग तरीकों से दोहराते हैं। जहाँ एक ओर गुरु नानक की वाणी में उस समय के लोकप्रिय संतों की रचनाएँ सम्मिलित हैं, वहीं उसमें उनका अपना बहुत कुछ मौलिक भी है। विशेषकर ईश्वर की प्रकृति का जो वर्णन उन्होंने किया है, वैसा सूक्ष्म और विस्तृत वर्णन किसी और मध्यकालीन संत के यहाँ नहीं मिलता। मध्यकालीन संतों की वाणियों के कई मत-पंथ अस्तित्व में आए लेकिन गुरु नानक का पंथ ही ऐसा इकलौता पंथ है, जो उनके बाद भी निरंतर और जीवंत होता रहा है। इससे यह स्पष्ट है कि उनकी वाणी केवल एक विचार नहीं है बल्कि लाखों लोगों की जीवन-पद्धति का आधार बन गयी है।

प्रस्तुत चयन में गुरु नानक की प्रामाणिक और आधिकारिक मानी जाने वाली रचनाओं में से श्रेष्ठ रचनाओं को प्रस्तुत किया गया है।

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Authors

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Paperback

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Pages

Language

Hindi

Publishing Year

2023

Pulisher

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