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Hindi Upanyas Rashtra Aur Hashiya
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₹295.00 ₹225.00
Author: Shambhunath
Pages: 368
Year: 2016
Binding: Paperback
ISBN: 9789352294718
Language: Hindi
Publisher: Vani Prakashan
हिन्दी उपन्यास राष्ट्र और हाशिया
हम उपन्यास को सांस्कृतिक पाठ के रूप में कैसे पढ़ सकते हैं, बीसवीं सदी से आज तक हिंदी उपन्यास ने किन रास्तों से प्रगति की, कथाकारों ने राष्ट्र और हाशिये के रिश्तों को कैसे देखा, भारतीय उपन्यास क्यों ‘राष्ट्रीय रूपक’ की जगह ‘ह्यूमन एलेगरी’ और विस्थापित इतिहास की ‘अनसुनी आवाजें’ हैं और इनमें कैसी विश्व दृष्टि है-इन सवालों से टकराती है आलोचना पुस्तक ‘हिंदी उपन्यास : राष्ट्र और हाशिया’। शंभुनाथ ने इसमें हिंदी के कई महत्त्वपूर्ण उपन्यासों को सैद्धान्तिक क्लिशे से हटकर एक खुली जमीन से देखा है, साथ ही वैश्वीकरण के कठिन समय को भी पहचाना है।
पुस्तक में ‘राष्ट्र बनाम हाशिया’ की जगह ‘राष्ट्र और हाशिया’ के प्रश्नों पर आलोचनात्मक संवाद है। यह पहली बार एक बड़े फलक पर हिंदी उपन्यास का मूल्यांकन है। इसमें राष्ट्र पर मँडराती नव-औपनिवेशिक छायाओं को समझने के साथ, हाशिये के विमर्शों-स्त्री, दलित, कृषक, आदिवासी और ‘स्थान’ के सवालों पर भी खुले मन से चर्चा है। शंभुनाथ के लिए आलोचना कट्टरताओं के बीच जीवन के लिए जगह बनाना है, जो उनकी पारदर्शी भाषा में यहाँ भी देखने को मिलेगी।
| Authors | |
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| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2016 |
| Pulisher |
शंभुनाथ
हिंदी के प्रतिष्ठित आलोचक। हिंदी विभाग, कलकत्ता विश्वविद्यालय में 1979 से 2014 तक अध्यापन। 2006-08 के बीच केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के निदेशक पद पर रहते हुए देश और विदेश में हिंदी के लिए विपुल कार्य।
प्रमुख पुस्तकें : संस्कृति की उत्तरकथा (2000), धर्म का दुखांत (2000), दुस्समय में साहित्य (2002), हिंदी नवजागरण और संस्कृति (2004), सभ्यता से संवाद (2008), रामविलास शर्मा (2011), भारतीय अस्मिता और हिंदी (2012), कवि की नई दुनिया (2012), राष्ट्रीय पुनर्जागरण और रामविलास शर्मा (2013), उपनिवेशवाद और हिंदी आलोचना (2014), प्रेमचंद का हिंदुस्तान : साम्राज्य से राष्ट्र (2014)।

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