

Hool

Hool
₹299.00 ₹229.00
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Author: Bhalchandra Nemade
Pages: 240
Year: 2023
Binding: Paperback
ISBN: 9788119159017
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
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Description
हूल
हूल में चांगदेव पाटील नाम के एक युवा के जरिए भालचन्द्र नेमाड़े भारतीय जीवन और समाज की कमजोरियों के साथ उसकी जिजीविषा को भी एक बड़े फलक पर अंकित करते हैं। मन का सूक्ष्म और संसार का स्थूल यहाँ साथ-साथ चलता है जिसे उनकी व्यापक विश्वदृष्टि एक महाकाव्यात्मक आयाम देती है।
हूल का चांगदेव एक बदला हुआ चांगदेव है, मुम्बई में अपने विद्यार्थी काल में हुए आदर्शनाशी अनुभवों के बाद अब वह यथार्थ का सामना करने के लिए तैयार है जिसके लिए वह एक छोटे से कस्बे में आकर अध्यापक हो जाता है। ‘कन्वर्टेड’ ईसाइयों के इस विद्यालय में उसे जातिवाद, लिंगभेद और संकीर्ण विभागीय राजनीति के अनेक ऐसे रूप देखने को मिलते हैं जो पुनः उसे उतना ही सम्भ्रमित कर छोड़ते हैं, जितना वह यहाँ आने से पहले था। उसे चिढ़ होती है, अपने आप पर दया आती है, और अपने आसपास के लोगों और जीवन पर क्रोध। प्रोफेसर बनने का उसका सुन्दर सपना यहाँ धराशायी हो जाता है।
लेकिन चांगदेव उनमें से नहीं हैं जो धारा के साथ चलने लगें और अन्ततः उसी का हिस्सा हो जाएँ, उनमें से भी नहीं जो शक्तिमन्त संरचनाओं के आगे घुटने टेक दें, और स्वयं के शक्तिशाली होने के लिए अपने अस्तित्वगत मूल्यों को तिलांजलि दे दें। विरोध करने का, खुद के सत्त्व को बचाने का उसका अपना तौर-तरीका है। अन्तस की लाख गुंजलकों के बीच अपनी असहमति की रक्षा करना वह जानता है, इसलिए बेहतर की ओर उठे अपने कदम को वह कभी वापस नहीं लेता। जगत को जिस वृहत रूप में वह देखता है, व्यक्ति और समाज के बीच जो प्राकृतिक सम्बन्ध उसे महसूस होता है, उसके साथ चेतना की अपनी यात्रा को वह सतत जारी रखता है।
हूल स्वतंत्र रूप से भी उतना ही दिलचस्प और पूर्ण पाठ है, जितना कि शृंखला की एक कड़ी के रूप में। यह एक बड़ी विशेषता है।
Additional information
| Binding | Paperback |
|---|---|
| Authors | |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2023 |
| Pulisher |









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