Jankavi Parsan Vyakti Aur Sahitya
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जनकवि परसन व्यक्ति और साहित्य
परसन अपने समय का एक ऐसा प्रभावी ‘सोशल कमेंटेटर’ है जो निर्भीक है, स्पष्टवादी है; जिसे देश की सामाजिक, राजनैतिक और सांस्कृतिक समस्याओं की गहरी परख है और उसका लेखन एक सामान्य व्यक्ति को भी अपने आस-पास के परिवेश को समझने में मदद करता है। परसन दलित है, लेकिन उसकी लेखनी दलित जीवन पर नहीं है। परसन के साहित्य का महत्व इतिहासकारों, समाजशास्त्रियों और लोकवार्ता के क्षेत्र में काम करने वाले विशेषज्ञों के लिए दिशा-निर्धारक भी हो सकता है। परसन की रचनाएँ तत्कालीन सामाजिक परिवेश को समझने के लिए ऐतिहासिक दस्तावेज के समान हैं डॉ. विमलेश कान्ति वर्मा देश के लब्धप्रतिष्ठ भाषावैज्ञानिक हैं और प्रवासी साहित्य और संस्कृति-विशेषज्ञ के रूप में भी देश में जाने जाते हैं। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से डी.फिल. की उपाधि ली और दिल्ली विश्वविद्यालय में पाँच दशकों से भी अधिक समय तक अनुप्रयुक्त भाषा विज्ञान का अध्यापन कर सेवानिवृत्त हुए। वे रॉयल एशियाटिक सोसाइटी ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एंड आयरलैंड के फेलो भी हैं।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2024 |
| Pulisher |











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