Jiska Ant Nahin

-25%

Jiska Ant Nahin

Jiska Ant Nahin

299.00 225.00

In stock

299.00 225.00

Author: Rajendra Dani

Availability: 5 in stock

Pages: 136

Year: 2022

Binding: Hardbound

ISBN: 9789355181817

Language: Hindi

Publisher: Vani Prakashan

Description

जिसका अन्त नहीं

राजेन्द्र दानी की कथा-यात्रा सुदीर्घ और व्यापक है और एक लम्बे कालखण्ड के परिवर्तन का दस्तावेज़ भी है। वे प्रगतिशील चेतना और मानवीय मूल्यों से आधुनिकता, उत्तर-आधुनिकता और नये यन्त्रीकरण की टकराहट से होने वाले सामाजिक और आन्तरिक बदलाव को संवेदना, कौशल और सरलता से अपनी लेखनी में दर्ज करने वाले कथाकार हैं।

जिसका अन्त नहीं राजेन्द्र दानी का नवीनतम उपन्यास है जो मध्यवर्गीय समाज और व्यवस्था के भीतरी तन्त्र की गहन पड़ताल करता है। यह तन्त्र मध्यमवर्गीय मनुष्य के अस्तित्व पर गोपनीय विपत्तियों के ऐसे नरम जाले बुन देता है जिससे मुक्त होने के लिए उसे अपने अस्तित्व के ही साथ युद्ध करना पड़ता है। एक ऐसा युद्ध जिसमें हमलावर भी प्रत्यक्ष नहीं। व्यवस्था के भीतर की जटिलताएँ मनुष्य मन की कोमलता, उसकी करुणा, आवाज़ और सहनशक्ति धीरे-धीरे सब कुछ शिथिल कर देती हैं।

पीढ़ियों के अन्तराल के बावजूद, नयी-पुरानी पीढ़ी के मध्य घटित होने वाले मूल्यों के आपसी टकराव, दोनों पक्षों की आन्तरिक व्यवस्थाएँ और उनकी प्रतिबद्धताएँ किस तरह समाज को बदलते हैं, इस मूल्यांकन को राजेन्द्र दानी अपने कथा संसार में बारीकी से दर्ज करते हैं।

उनके गद्य को पढ़ते हुए कभी ऐसा महसूस नहीं होता कि हम किसी यत्नपूर्वक गढ़ी गयी साहित्यिक कृति को पढ़ रहे हैं बल्कि हमेशा यह अहसास होता है कि हमारे चारों ओर फैले और निरन्तर फैलते जा रहे मध्यवर्ग की यह जानी पहचानी कथा है। यह ऐसी कथा है जो हमारे आसपास घटित हो रही थी लेकिन हम इसे इसकी विडम्बनाओं के साथ देख नहीं पा रहे थे। इस दृष्टि से यह एक सहज-अदृश्य का उतना ही सहज शब्दांकन है।

Additional information

Authors

Binding

Hardbound

ISBN

Language

Hindi

Pages

Publishing Year

2022

Pulisher

Reviews

There are no reviews yet.


Be the first to review “Jiska Ant Nahin”

You've just added this product to the cart: