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Description
कभी कश्मीर कभी कन्याकुमारी
भारत को जानना केवल उसके भूगोल को जानना नहीं, बल्कि उसकी यात्राओं को जीना है।
कभी कश्मीर कभी कन्याकुमारी सुप्रसिद्ध यात्रा-लेखक उमेश पंत का एक आत्मीय यात्रा-वृत्तांत है, जिसमें कश्मीर से कन्याकुमारी तक फैले भारत के विविध भूगोल, संस्कृति, इतिहास, प्रकृति और लोकजीवन का संवेदनशील चित्रण किया गया है।
यह किताब केवल पर्यटन स्थलों का परिचय नहीं कराती, बल्कि एक सजग यात्री की दृष्टि से भारत को देखने और समझने का अवसर देती है। इसमें कश्मीर की चिल्लाई कलाँ की ठिठुरन है, रामेश्वरम् की समुद्री बयार है, बनारस की जीवंत बतरस है, फूलों की घाटी का एकांत है, लेपाक्षी की प्रस्तरकला है, जयपुर के महलों की शाही भव्यता है, सारनाथ की आध्यात्मिक विरासत है और खजुराहो की अद्भुत शिल्पकला। इन यात्राओं के माध्यम से लेखक भारत की विविधताओं के भीतर छिपी उसकी गहरी सांस्कृतिक एकता को भी रेखांकित करते हैं।
मोटरसाइकिल, पैदल, जलयान, विमान और दुर्गम पर्वतीय मार्गों से पूरी हुई ये यात्राएँ केवल स्थानों तक पहुँचने की कहानियाँ नहीं हैं, बल्कि मनुष्यों, प्रकृति और बदलते समय से संवाद की यात्राएँ भी हैं। लेखक पाठक को यह महसूस कराते हैं कि एक सच्चा यात्री केवल दृश्य नहीं देखता, बल्कि अपने आसपास के जीवन, पर्यावरण और समाज के प्रति अधिक संवेदनशील होकर लौटता है।
सरल, प्रवाहपूर्ण और साहित्यिक भाषा में लिखी गई यह यात्रा-वृत्तांत की किताब यात्रा-साहित्य, भारतीय संस्कृति, इतिहास और प्रकृति में रुचि रखने वाले प्रत्येक पाठक के लिए समान रूप से पठनीय और प्रेरक है। यह किताब भारत को मानचित्र से आगे, अनुभवों, स्मृतियों और मानवीय संवेदनाओं के माध्यम से जानने का आमंत्रण देती है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2026 |
| Pulisher |











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