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Description
कर लेंगे सब हजम
मृदुला गर्ग हिंदी की ऐसी जानी-मानी कथाकार-उपन्यासकार का नाम है, जिनकी रचनाओं में व्यंग्य की अंतर्धाराएं हमेशा से बहती रही हैं। इस संग्रह की विशेषता यह है कि वह व्यंग्य जो पहले रचनाओं के पार्श्व में हुआ करता था, यहां सीधे मंच पर अवतरित है। एक स्वतंत्र विधा के रूप में बड़े शक्तिशाली तरीके से लेखिका की क्षमता का अहसास करा जाता है। यहां व्यंग्य सारी साज-सज्जा के साथ मौजूद है। ‘कर लेंगे सब हजम’ – इससे बेहतर और सटीक अभिव्यक्ति क्या हो सकती है हमारे समय की!
आधुनिक समय और समाज से किस तरह नैतिक मूल्य, सद्विचार, बड़प्पन और अच्छाइयों का द्रुत गति से लोप होता चला जा रहा है, का मृदुला ने बड़े चुटीले अंदाज में कतरा-कतरा लेखा-जोखा प्रस्तुत किया है। हमारे समय और समाज की असंगतियों पर ये छोटे-छोटे व्यंग्य लेख गहरी चोट करते हैं, लेकिन ‘सांप मर जाए और लाठी भी न टूटे’ वाले अंदाज में। व्यंग्य की सबसे बड़ी विशेषता और पहचान यही होती है। यह अकारण नहीं है कि आज पत्र-पत्रिकाओं में सबसे ज्यादा प्रमुखता व्यंग्य को मिल रही है।
इनमें से अधिकतर व्यंग्य हिंदी की मशहूर पत्रिका ‘इंडिया टुडे’ में ‘कटाक्ष’ कालम के अंतर्गत छपते रहे हैं। कुछेक ‘आउट लुक’, ‘जनसत्ता’ और ‘हिंदुस्तान’ में भी छपे हैं। किताब के रूप में इनका संग्रहीत होना स्वागत योग्य है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2019 |
| Pulisher |











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