Kebang : Loktantra Ki Ek Puratan Sanstha
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केबांग : लोकतंत्र की एक पुरातन संस्था
युवा लेखकों के लिए प्रधानमंत्री की मेंटरशिप योजना ‘युवा’ – YUVA 2.0 (युवा, उदीयमान और प्रतिभाशाली लेखक) केबांग अरुणाचल राज्य के आदि जनजाति की एक बहुमुखी प्रथागत संस्था है, जो पारंपरिक मूल्यों में जनतंत्र के आदर्शों को सत्यापित करती है। पुरातन काल से ही आदियों के सामाजिक चरित्र में लोकाचार के प्राथमिक गुणों का वास रहा है एवं आज भी केबांग की यह व्यवस्था आदि समुदाय में अपना प्रभुत्व स्थापित किए हुए है। वस्तुतः आदियों की यह पारंपरिक स्वशासनिक संस्था भारत के लोकतांत्रिक सदाचार की भावना को एक नए ढंग से प्रस्तुत करती है। इस पुस्तक में इसकी कार्यपद्धति को मुख्यतः तीन आयामों सामाजिक, न्यायिक व राजनैतिक स्वरूप में विभाजित कर इसके औचित्य को भली भांति समझने का प्रयास किया गया है। इतिहास में इसकी निरंतरता पर चर्चा करते हुए आदि लोगों की ग्राम परिषद से राज्य स्तर पर उनकी एक उच्चतम संस्था के रूप में इसके अभ्युदय की गाथा का सारगर्भित वर्णन किया गया है। एक बहुआयामी व बहुप्रयोजनिक संस्था की काया में, केबांग गांव की एक सर्वोच्च प्रशासनिक इकाई है। यह सभी ग्रामवासियों की एक संगठित सभा है, जो ग्रामीण जीवन के सामाजिक, आर्थिक व न्यायिक पहलुओं को संचालित करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। पुराने समय में ग्राम की इस परिषद को ‘डोलूँगकेबांग’ के नाम से जाना जाता था। वर्तमान समय में यह ‘डोलूँगकेबांग’, ‘बंग्गोकेबांग’, ‘बोगुमबोकांगकेबांग’ व ‘आदि बने केबांग’ द्वारा एक बहुस्तरीय संस्था के रूप में विद्यमान है।
Additional information
| ISBN | |
|---|---|
| Authors | |
| Binding | Paperback |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2025 |
| Pulisher |











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