Kuch Dil Ne Kaha

-20%

Kuch Dil Ne Kaha

Kuch Dil Ne Kaha

350.00 280.00

In stock

350.00 280.00

Author: Priyanka Jodhawat

Availability: 19 in stock

Pages: 368

Year: 2025

Binding: Paperback

ISBN: 9789355362421

Language: Hindi

Publisher: Bodhi Prakashan

Description

कुछ दिल ने कहा

सौंधी- माटी का अर्क बनने की संभावनाएं लिए एक ताजगी भरी लेखनी-‘कुछ दिल ने कहा’

प्रियंका जोधावत जी की यह किताब किसी वर्ग या वर्णमाला विशेष के खांचे में नहीं रखा जा सकती।

लेखिका की सहज आकांक्षा हो सकती है कि यह चूंकि ‘दिल दा’ मामला है इसलिए इसकी धडकनों और नब्ज़ की संवेदना व उतार चढाव का खयाल करके इसे ‘आहिस्ता आहिस्ता’ अनुभूत किया जाए।

चूंकि दिल एक मंदिर भी होता है इसलिए इसकी अस्मिता व निजता को भी समझा जाए। फिर कहावत भी कुछ ऐसी ही है – लेखनी नारी पुस्तिका पर हस्ते गता गता।

लेखिका की कला ,संगीत ,साहित्य,काव्य संस्कारो के अनुभूत आयामों को मद्देनजर रखते हुए ही इसके विविध संदर्भों की एकरूपता पर ही कोई मुकम्मल बात की जानी चाहिये।

प्रियंका जी ने इसके लिए अपने जीवन दर्शन का झरोखा चार दिशाओं में खोलकर भी रख दिया है जिससे उनके पाठक को स्पंदन,  कलम का संगीत , मृदुल स्पर्श व स्वर्ण प्रकाश की किरणों के आलोक में ही उसके कृतिकार का परिचय सहज ही मिल जाए।

संगीत जो शब्द भी है और शब्दातीत आनंद भी।इस संगीत को सुनना और गुनगुनाना तो जरूरी लगता ही है। जब कुछ दिल ने कह ही दिया है तो इसके एकांगी सूने साज से तराने भी निकलेंगे।

हमारी समीक्षा इस रूप में न किसी पत्थर दिल इंसान की बयानबाजी होगी न ही आंसुओं की झड़ी लगाने वाली गलदश्रु भावुकता । बल्कि इसकी लेखिका की ही दुनियां को समझने का उनकी ही शैली का कोई अंदाजे बयां ही होगा।

जब किताब के पन्नों व ‘रोशनाई में फना और जिन्दा’ भी लेखिका होने का दावा करती है तो फिर ‘सब्रे समीम के असर’ की बात और दूसरा कौन करेगा ? इसका जवाब भी प्रियंका देती हैं।इधर इस सब में और सबसे एक नयी हलचल की शुरूआत होती है जिसमें प्रियंका की कायनात विस्तार लेती चली जाती है। सकारात्मक सृजन , विश्वास की सहजता,नाद और शब्द की प्राणमय शक्ति का संचार,उनकी मां की ममतामयी गोद और बेटी सिद्धांगना को थपकियां देते हुए पूरा होता है।

इस किताब में हमें अगर सौंधी माटी की सुगंध आती अनुभूत होती है तो इसके बिखराव के आरोह- अवरोह में मूर्त अमूर्त जिंदादिल शख्सीयत भी दिखती है।

इसके सभी शीर्षक व उपशीर्षक दुरुस्त व सटीक व लक्ष्यबेधी लगते हैं। भारतीय संस्कृति काव्यधारा के महान साहित्यकारों व दिलकश अंदाज में अभिनेताओं अभिनेत्रियों के रोचक रोमांचक निजी व नजदीकी संस्मरण,मुलाकातों व सौग़ातों के रंगीन संदर्भ भी हैं और इसकी रिद्धि- सिद्धि हुई है सबके प्रिय रफी साहब व उनके रफी विला  के ख्वाबगाह से।

शब्दों के दिलकश अंदाज में नैसर्गिक सी प्रियंका की किताब ‘कुछ दिल ने कहा’ ताजी लेखनी,नए से अंदाज़ पर शायद यकीनन बहुत कुछ कहा जाएगा। स्वागत।

अशोक आत्रेय

Additional information

ISBN

Authors

Binding

Paperback

Language

Hindi

Pages

Publishing Year

2025

Pulisher

Reviews

There are no reviews yet.


Be the first to review “Kuch Dil Ne Kaha”

You've just added this product to the cart: