Lok Sahitya Aur Bhartiya Sanskriti (2 Vol Set)
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लोक साहित्य और भारतीय संस्कृति
लोक यायावर देवेंद्र सत्यार्थी लोक साहित्य और लोक संस्कृति के महान साधक हैं, जिन्होंने अपना पूरा जीवन लोकगीतों की खोज में लगा दिया। अपने धूल भरे पैरों से इस महादेश की अनंत परिक्रमाएँ करते हुए, उन्होंने अकेले अपने दम पर तीन लाख लोकगीतों की खोज करके माँ भारती की झोली भरी। गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर और महामना मालवीय का उन्हें आशीर्वाद मिला, तो राजगोपालाचार्य और के.एम. मुंशी सरीखे विद्वानों से उनके काम की मुक्त भाव से प्रशंसा क
महात्मा गाँधी को सत्यार्थी जी का यह काम देश की आजादी की लड़ाई से ही जुड़ा एक अनमोल कार्य लगता था, जिसमें देश की कोटि–कोटि जनता की भावनाएँ भी शामिल थीं। यह बड़े सुख और आनंद की बात है कि भारतीय संस्कृति जो इतनी विराट, अनंत और बहुरूपमयी है, उसे सीधे–सरल शब्दों में बाँधने की कोशिश बीसवीं सदी के प्रारंभ में इस औघड़ फकीर ने की, जो सही मायने में लोक साहित्य का मसीहा था। सत्यार्थी जी ने बताया कि आप खेत–खेत में हुमचती फसलों सरीखे लोकगीतों के निकट जाइए, तो भारतीय संस्कृति खुद–ब–खुद आपकी झोली में आ जाएगी। इसलिए कि लोक साहित्य ही भारतीय संस्कृति की आधारपीठिका है। सत्यार्थी जी ही मानो पहले पहल एक शिशु की सी निर्मलता के साथ लोकगीतों के निकट गए, और उनके हृदय को टटोला, उनकी आत्मा को पहचाना। साथ ही सीधे हृदय से निकले अपने भावपूर्ण लेखों के जरिए उसे हजारों पढ़े–लिखे शहराती लोगों तक पहुँचाया, जो अभी तक इन्हें गँवई चीज मानकर हेठी निगाहों से देखते थे।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2024 |
| Pulisher |











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