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Description
मेकल पहाड़ियों के लोकगीत
‘मेकल पहाड़ियों के लोकगीत’ मात्र गीतों का संग्रह नहीं बल्कि हमारी विलुप्त होती जनजातीय विरासत का एक सजीव दस्तावेज़ है। मेकल पर्वत-शृंखला के घने जंगलों में बसने वाले गोंड, बैगा और अन्य लोक-समुदायों के सुख-दुख, मिलन-विरह और राग-विराग सहित वस्तुत: जीवन के समस्त आधार-व्यवहार इन गीतों में बेहद खूबसूरती से पिरोये गए है। ‘प्रकृति, प्रेम और मनुष्य के आदिम राग की एक जादुई यात्रा—जो सीधे मध्य भारत के पहाड़ों और जंगलों की आत्मा से निकलती है।’
यह पुस्तक उन लोक-आवाजों को पृष्ठों पर उतारती है जो आधुनिकता की चकाचौंध में कहीं ओझल हो रही थीं। सदियों पुराने मौखिक साहित्य को सँजोने वाली यह कृति न केवल आम पाठकों को मंत्रमुग्ध करती है, बल्कि विद्यार्थियों, शोधार्थियों, अध्येताओं और अध्यापकों के लिए भी एक प्रामाणिक सन्दर्भ-ग्रन्थ के रूप में अत्यन्त लाभकारी सिद्ध होगी। मानवविज्ञान, समाजशास्त्र और लोक-साहित्य के क्षेत्र में गहन अध्ययन करनेवालों के लिए यह पुस्तक प्राथमिक स्रोतों की और सांस्कृतिक विश्लेषण की एक अमूल्य मार्गदर्शिका है।
यदि आप भारत की लोक-साहित्यिक जड़ों, सांस्कृतिक विविधता और जनजातीय जीवन की गहरी एवं प्रामाणिक समझ पाना चाहते हैं तो यह कृति आपके अध्ययन और पुस्तक-संग्रह का एक अनिवार्य हिस्सा बनेगी। आइए, मेकल की सुरम्य पहाड़ियों के इन अद्भुत लोकगीतों के संग एक अविस्मरणीय और अनूठे अकादमिक सफ़र पर चलें।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2026 |
| Pulisher |











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