Manak Hindi Ke Shuddh Prayog : Vol. 3
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मानक हिन्दी के शुद्ध प्रयोग – 3
सशक्त अभिव्यक्ति के लिए समर्थ हिंदी चाहिए। इस नए ढंग के व्यवहार-कोश में पाठकों को अपनी हिंदी निखारने के लिए हजारों शब्दों के बारे में बहुपक्षीय भाषा-सामग्री मिलेगी। इस में वर्तनी की व्यवस्था मिलेगी, उच्चारण के संकेत-बिंदु मिलेंगे व्युत्पत्ति पर टिप्पणियाँ मिलेंगी, व्याकरण के तथ्य मिलेंगे सूक्ष्म अर्थभेद मिलेंगे, पर्याय और विपर्याय मिलेंगे संस्कृत का आशीर्वाद मिलेगा, उर्दू और अँग्रेजी का स्वाद मिलेगा प्रयोग के उदाहरण मिलेंगे, शुद्ध-अशुद्ध का निर्णय मिलेगा। पुस्तक की शैली ललित निबंधात्मक है।
इसमें कथ्य को समझाने और गुत्थियों को सुलझाने के दौरान कठिन और शुष्क अंशों को सरल और रसयुक्त बनाने के लिहाज से मुहावरों, लोकोक्तियों, लोकप्रिय गानों की लाइनों, कहानी-किस्सों, चुटकुलों और व्यंग्य का भी सहारा लिया गया है। नमूने देखिए स्त्रीलिंग ‘दाद’ (प्रशंसा) सब को अच्छी लगती है, पर पुर्लिंग ‘दाद’ (चर्मरोग) केवल चर्मरोग के डॉक्टरों को अच्छा लगता है।–‘मैल, मैला, मलिन’ सब ‘मल’ के भाई-बंधु हैं।–(‘साइकिल’ को) ‘साईकील’ लिखनेवाले महानुभाव तो किसी हिंदी-प्रेमी के निश्चित रूप से प्राण ले लेंगे दुबले को दो असाढ़ !–अरबी का ‘नसीब’ भी ‘हिस्सा’ और ‘भाग्य’ दोनों है। उदाहरण आप के नसीब में खुशियाँ ही खुशियाँ हैं। (जब कि मेरे नसीब में मेरी पत्नी हैं !) यह पुस्तक हिंदी के हर वर्ग और स्तर के पाठक के लिए उपयोगी है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Pages | |
| Publishing Year | 2023 |
| Pulisher | |
| Language | Hindi |











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