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पंचकोशी मेला
पंचकोशी मेला, कुंभ मेला, हेमिस गोम्पा मेला, सोनपुर मेल, चोखा मेला आदि अनेक मेलों की तरह भारत के गाँवों और सांस्कृतिक शहरों में लगनेवाला एक प्रसिद्ध मेला है जहाँ भारतीय ज्ञान, सामाजिक संस्कृति और मानव सभ्यता के विराट रूप का दर्शन होता है। यह मेला देश में अनेक जगहों पर लगता है, परंतु इस पुस्तक के केंद्र है बक्सर; जहाँ आज से करीब तीन हजार वर्ष पूर्व बनारस से बलिया के बीच एक सभ्यता का उदय हुआ जिसका उल्लेख गंगाघाटी सभ्यता के रूप में मिलता है। पुस्तक में यह देखने का प्रयास किया गया है कि बक्सर क्षेत्र में मौजूद सिद्ध ऋषियों के कारण यहाँ ज्ञान एवं दर्शन की अनेक परंपराओं का उदय हुआ। पुस्तक में दिखलाया गया है कि उन ऋषियों में पाँच ऋषियों का लोक समाज के साथ गहरा संवाद था-गौतम ऋषि, देवर्षि नारद, भार्गव ऋषि, उदालक ऋषि और ब्रद्मर्षि विश्वामित्र। ये पाँचों ऋषि पाँच कोस की दूरी पर क्रमशः अहिरौली, नदाँव, भभुअर, नुआँव और बक्सर में रहते थे तथा उन स्थानों पर नवंबर के आसपास माघ की पंचमी में दीपावली के बाद पाँचों स्थानों पर बारी-बारी से पाँच दिनों के लिए यह मेला लगता है। यह किताब बताती है कि इस मेला को जानना और इसका अध्ययन करना कहीं-न-कहीं उस भारत को भी समझना है जिसका मानवीय सभ्यता और पारंपरिक ज्ञान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2021 |
| Pulisher |











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