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Description
क़ैद से छूटा हुआ परमात्मा
‘क़ैद से छूटा हुआ परमात्मा’ नामक रचना कारेल चापेक के उपन्यास ‘तोबराना ना एब्सलूटनो’ का संक्षिप्त हिन्दी रूपान्तर है। यह उपन्यास उस समय में लिखा गया जब आधुनिक तकनीकी विज्ञान तेज़ी से विकसित हो रहा था और विचारशील लोगों के मन में यह चिन्ता उत्पन्न हो गयी थी कि विज्ञान सामाजिक और मानवीय मूल्यों को नष्ट कर देगा। इस उपन्यास में लेखक ने कृत्रिम मानव-यन्त्र की कल्पना की है तथा उसे रोबोट नाम दिया है। चापेक विज्ञान की उपलब्धियों के प्रशंसक हैं लेकिन मानव-जाति के भाग्य और जनसाधारण के जीवन के बारे में भी चिन्तित हैं। यह कृति मूलरूप से सामाजिक और दार्शनिक है। उपन्यास में शुद्ध दार्शनिक घटनाएँ हैं तथा साधारण घटनाओं के प्रकाश में मानवीय सम्बन्धों का विश्लेषण किया गया है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| Language | Hindi |
| ISBN | |
| Pages | |
| Publishing Year | 2017 |
| Pulisher |











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