- Description
- Additional information
- Reviews (0)
Description
रघुवीर सहाय : रचनाओं के बहाने एक स्मरण
विविध विधाओं में सिद्धहस्त लेखक मनोहर श्याम जोशी ने रघुवीर सहाय रचनावली उलटते-पलटते उस पर कुछ लिखने का मन बनाया। लिखना समीक्षा चाहते थे, पर लिख गए एक ऐसी रचना जिसके बिना अब रघुवीर सहाय का कोई भी ‘अध्ययन’ अधूरा ही कहलाएगा। पुस्तक लिखनी शुरू हुई समीक्षा की शक्ल में। संस्मरण सी बनने लगी। पर उसमें ‘रघुवीर’ के व्यक्तित्व के, उसकी कविताओं के, हिन्दी साहित्य और पत्रकारिता के एक दौर के उत्थान-पतन का एक ईमानदार विश्लेषण भी चलता रहता है। उस पर गहरी आत्मीयता । ‘आत्मकथाओं’, ‘संस्मरणों’ के ‘विस्फोट’ के इस दौर में यह पुस्तक नयी विधा सी बनाती दिखाई देती है।
‘असहिष्णु’ होते चले जाते समय में इस पुस्तक में ‘जोजशू’ और ‘रघुवीर’ की मित्रता भी पुस्तक को एक और आयाम देती दिखाई देती है। ‘सांस की लय’ के बेजोड़ कवि रघुवीर सहाय के अनन्य प्रशंसक के रूप में मनोहर श्याम जोशी द्वारा उनकी कविताओं के ‘पाठ परक’ विश्लेषण को आलोचना विधा में भी अपने आपको ‘सिद्ध’ करने के प्रमाण के रूप में पढ़ा जा सकता है।
हिन्दी के पहले समाचार साप्ताहिक ‘दिनमान’ और उससे जुड़े किस्से ‘टेलीविज़न-पूर्व’ दौर की ‘प्रिंट पत्रकारिता की सफल-असफल कहानी इस पुस्तक को ‘पत्रकारिता एंगल’ देती दिखाई देती है।
कुल मिलाकर, यह एक ऐसी किताब है जो हिन्दी साहित्य के सुधी पाठकों, कवियों, लेखकों के साथ-साथ छात्रों, शोधकर्ताओं, विश्लेषकों सबके महत्व की है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2025 |
| Pulisher |











Reviews
There are no reviews yet.