Rajani Din Nitya Chala Hi Kiya

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Rajani Din Nitya Chala Hi Kiya

Rajani Din Nitya Chala Hi Kiya

250.00 188.00

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250.00 188.00

Author: Hazari Prasad Dwivedi

Availability: 5 in stock

Pages: 136

Year: 2019

Binding: Hardbound

ISBN: 9788170165385

Language: Hindi

Publisher: Kitabghar Prakashan

Description

रजनी दिन नित्य चला ही किया

गुरुवर आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी ने अनेक विधाओं में रचना की है। उनका कवि रूप अपेक्षाकृत अल्पज्ञात है।  उनकी कविताओं में, उनके निबंधों की ही भाँति, सर्वत्र एक विनोद-भाव मिलता है। गंभीर चिंतन और व्यापक अध्ययन को सहज तौर पर हलके-फुलके ढंग से पाठक श्रोता पर बोझ डाले बिना प्रकट करना उनके व्यक्तित्व और लेखक की विशेषता और क्षमता है। द्विवेदी जी लोकवादी विशेषण को पसंद नहीं करते थे, क्योंकि वे लौकवाद का संस्कृत में क्या अर्थ होता है, समझते थे। लेकिन वे महत्व सबसे अधिक लोक को देते थे। वे बोलियों, लोक-साहित्य, लोक-धुनों और जन-प्रचलित लोक-साहित्य रूपों पर अतीव गंभीरता से विचार करते थे। द्विवेदी जी ने संस्कृत और अपभ्रंश में भी कविता की है। उनकी काव्य-दृष्टि मनुष्य की उच्चता और नीचता दोनों को देखती है, इसीलिए उनकी कविताओं में संवेदना और समझ का संयोग है।

[भूमिका से]

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Authors

Binding

Hardbound

ISBN

Language

Hindi

Pages

Publishing Year

2019

Pulisher

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