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Ravindranath Ki Parlok Charcha
₹299.00 ₹225.00



₹299.00 ₹225.00
₹299.00 ₹225.00
Author: Amitabh Chowdhury
Pages: 200
Year: 2024
Binding: Paperback
ISBN: 9789360860912
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
रवीन्द्रनाथ की परलोक चर्चा
मृत्यु के बाद क्या जीवन का अस्तित्व रह जाता है ? आधुनिक विज्ञान यद्यपि इस प्रश्न का उत्तर नहीं दे सकता, फिर भी यह एक ऐतिहासिक तथ्य है कि सभ्यता के आदिकाल से मनुष्य इस प्रश्न से निरन्तर जूझता रहा है। भूत-प्रेतमूलक आदिम अन्धविश्वासों से ऊपर उठने पर भी प्राचीन तत्त्वचिन्तक ‘परलोक’ की कल्पना करते हैं और आत्मा के अस्तित्व को स्वीकार करते हैं। हमारे उपनिषदों ने तो स्पष्ट रूप से आत्मा के अविनश्वर होने की घोषणा कर डाली। ऐसी स्थिति में यह प्रश्न स्वाभाविक रूप से उठता है—‘क्या इन बातों को महज इसलिए उड़ा दिया जाए कि विज्ञान की प्रयोगशाला में इन्हें सिद्ध नहीं किया जा सकता ?’
प्रस्तुत पुस्तक में बांग्ला के सुख्यात शब्दशिल्पी अमिताभ चौधरी इसी प्रश्न को रेखांकित करते हुए अनेक रोचक एवं विस्मयकर तथ्यों की जानकारी देते हैं, जिनका विश्वकवि रवीन्द्रनाथ ठाकुर के जीवन और साहित्य से सीधा सम्बन्ध है। अपने जीवनकाल में उन्होंने अनेक प्रयोग किये थे और एक विशिष्ट ‘माध्यम’ के द्वारा परलोकगत आत्माओं से ‘बातचीत’ भी की थी। उन विस्तृत वार्तालापों के विवरण लिखित रूप में आज भी शान्तिनिकेतन के ‘रवीन्द्र-सदन’ में सुरक्षित हैं तथा उन्हीं को लेखक ने अत्यन्त प्रामाणिक और कलात्मक ढंग से इस पुस्तक में प्रस्तुत किया है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि मृत्यु के बाद के जीवन के सम्बन्ध में रवीन्द्रनाथ की आशा और आस्था असीम थी, उनके अनेकानेक गीतों और कविताओं में इसी की अभिव्यक्ति हुई है।
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2024 |
| Pulisher |
अमिताभ चौधरी
बांग्ला भाषा के महत्त्वपूर्ण साहित्यकार अमिताभ चौधरी का जन्म 16 जुलाई, 1928 को सिलहट (अब बांग्लादेश) में हुआ था। विभाजन के बाद उनका परिवार असम की बराक घाटी में आ बसा। उन्होंने कलकत्ता और शान्तनिकेतन में शिक्षा पाई। बाद में शान्तिनिकेतन के विश्वभारती विश्वविद्यालय में अध्यापन किया। 1956 में पेशेवर तौर पर ‘आनन्द बाजार पत्रिका’ से जुड़े और कुछ समय तक इस अख़बार के समाचार-सम्पादक रहे। फिर ‘युगान्तर’ और ‘आजकल’ अख़बारों के साथ भी जुड़े। अपने पत्रकार जीवन के दौरान इन्दिरा गांधी, शेख मुजीबुर रहमान और सुचित्रा सेन जैसी हस्तियों से उनकी नजदीकी बनी।

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