RSS : Kaya Aur Maya

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199.00 145.00

In stock

199.00 145.00

Author: Devanura Mahadeva

Availability: 5 in stock

Pages: 108

Year: 2025

Binding: Paperback

ISBN: 9788199312289

Language: Hindi

Publisher: Radhakrishna Prakashan

Description

आर.एस.एस. : काया और माया

‘आर.एस.एस. : काया और माया’ देवनूर महादेव की दशकों के अध्ययन और अनुभव का निचोड़ है। उन्होंने हिन्दुत्व के सबसे प्रभावशाली विचारकों की पुस्तकों को सावधानीपूर्वक पढ़ा है और कर्नाटक में संघ- परिवार की गतिविधियों को अपनी आँखों देखा है।

– रामचंद्र गुहा  

यह किताब हमारी ज़िन्दगियों पर आर.एस.एस. के कसते शिकंजे की कड़वी दास्तान है। यह एक फ़रियाद और एक चेतावनी है। यह अपनी शक्ति–अपनी सचाई–देवनूर महादेव के नज़रिये की स्पष्टता से, और उनकी सीधी-सादी सरल भाषा की पारदर्शिता से हासिल करती है, जैसे, ‘कट्टरता कहीं भी हो, वह मानवता को निगल जाती है’।

हमें उनकी सलाह पर ग़ौर करते हुए पूरी तरह सतर्क रहना चाहिए। कम-से-कम फ़िलहाल। ऐसा न हो कि उनकी बात वीराने की चीख़ होकर रह जाए।

– गीतांजलि श्री   

नफरत की राजनीति की जड़ पर वार करने वाला अहम प्रयास।

– चन्दन गौड़ा

देवनूर महादेव ने रचनात्मक राजनीतिक लेखन को सत्य की खोज के मार्ग के रूप में अपनाया है। वे घृणा की राजनीति का मुकाबला करने के लिए… लोगों से उनकी भाषा, उनके रूपकों और उनकी सांस्कृतिक स्मृतियों के जरिये बात करते हैं।

– योगेन्द्र यादव

देवनूर महादेव हमारे देश के प्रमुख समकालीन जन-बौद्धिक और चिन्तक हैं।

– विवेक शानबाग

अब सौ साल का हुआ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दरअसल है क्या? इसकी काया के पीछे छुपी माया क्या है? अब जबकि संघ से जुड़ी एक पार्टी सत्ता पर मज़बूती से क़ाबिज़ है, यह भारत को किस दिशा में ले जा रहा है ?

ये कुछ ऐसे सवाल हैं जिनके ग़ौरतलब जवाब देवनूर महादेव ने आर.एस.एस. : काया और माया में दिए हैं। मिथकों को आधुनिकता के और लोकवार्ताओं को गहरी राजनीतिक अन्तर्दृष्टि के बरअक्स रखकर देखने-परखने से हासिल इन जवाबों को पेश करते हुए, अपने ख़ास अन्दाज़ में वे पाठकों से आग्रह करते हैं : जब आर.एस.एस. का मायावी दानव भेष बदलकर हमारे दरवाज़े पर आता है, तब हमें उसकी बातों में नहीं आना चाहिए। ‘आज नक़द कल उधार’ की तर्ज़ पर हमें भी ग्रामवासियों की तरह अपने दरवाज़ों पर ‘नाले बा’ (कल आना) लिख देना चाहिए!

कन्नड़ सहित अनेक भाषाओं में बिक्री के कीर्तिमान बना चुकी यह असाधारण किताब सांस्कृतिक आलोचना और ऐतिहासिक व्याख्या के साथ-साथ राजनीतिक कार्रवाई का आह्वान भी है।

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Authors

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Paperback

ISBN

Language

Hindi

Pages

Publishing Year

2025

Pulisher

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