Samvidhan Sabha Ki 15 Mahila Sadasya
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संविधान सभा की 15 महिला सदस्य
युवा लेखकों के लिए प्रधानमंत्री की मेंटरशिप योजना ‘युवा’ – YUVA 2.0 (युवा, उदीयमान और प्रतिभाशाली लेखक) ऐसा कहा गया है कि कोई भी परिवार, समाज और देश स्त्री के बल पर ही अपनी पहचान प्राप्त करता है। स्त्री के बिना परिवार, समाज और देश किसी का अस्तित्व नहीं है। भारत की प्रथम महिला राज्यपाल सरोजिनी नायडू ने कहा था कि “यदि आदमी देश की शान है तो औरत उस देश की नींव है।” 26 नवंबर हम सब भारतीयों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है। 26 नवंबर, 1949 को संविधान सभा ने भारत के संविधान को स्वीकार किया था और इस दिन को हम सब देशवासी संविधान दिवस के रूप में मनाते हैं। 1895 ई. में स्वराज्य विधेयक के माध्यम से सर्वप्रथम संविधान निर्माण की माँग बाल गंगाधर तिलक द्वारा की गई। 1922 में गाँधी जी ने संविधान निर्माण की माँग की और 1924 में संविधान सभा का विचार स्वराज्य पार्टी ने प्रस्तुत किया था। 1940 में ब्रिटिश सरकार ने ‘अगस्त प्रस्ताव’ के तहत संविधान सभा की बात रखी, जिसे भारत के लोगों द्वारा अस्वीकार कर दिया गया। 1942 में ‘क्रिप्स प्रस्ताव’ के तहत संविधान निर्माण के प्रस्ताव को भी भारत के लोगों द्वारा अस्वीकार कर दिया गया। वर्ष 1946 में कैबिनेट मिशन के तहत भारतीय संविधान सभा का गठन हुआ था और इसकी पहली बैठक 9 दिसंबर 1946 को नई दिल्ली में हुई, जिसका मुस्लिम लीग ने बहिष्कार किया और अपने लिए अलग संविधान सभा की माँग की। संविधान सभा के कुल 389 सदस्यों में 15 महिला सदस्य भी थीं, जिन्होंने संविधान सभा में विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त करने के साथ महिला अधिकारों की वकालत की। संविधान सभा में इनकी भागीदारी महत्वपूर्ण थी। संविधान सभा की कुल 12 सभाओं में महिला सदस्यों ने अपना अमूल्य योगदान दिया। यह पुस्तक संविधान सभा की इन 15 नायिकाओं के जीवन और संविधान सभा में इनके योगदान, विचारों तथा इनकी उपलब्धियों का संक्षिप्त वर्णन करते हुए इन्हें सच्ची श्रद्धा अर्पित करती है।
Additional information
| ISBN | |
|---|---|
| Authors | |
| Binding | Paperback |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2025 |
| Pulisher |











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