Sanatan Pragya Prawah : Vedon Se Vivekanand Tak
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सनातन प्रज्ञा प्रवाह : वेदों से विवेकानंद तक
भारतीय सभ्यता संस्कृति एवं इतिहास को विश्व में प्राचीनतम माना और जाना जाता है। कहना न होगा कि विश्व का प्रथम ग्रंथ वेद भारतीय अध्यात्म एवं संस्कृति की ही देन है। प्रस्तुत पुस्तक में विद्वान लेखक ने मौखिक परंपरा से निःसृत, वेदों के काल से लेकर भारत की सनातन सभ्यता और धर्म तथा आध्यात्म को विश्वभर में प्रसारित करने वाले आधुनिक सनातन संत, स्वामी विवेकानंद तक की यात्रा के क्रम में, महाकाव्य काल, जैन-बौद्ध काल, दार्शनिक काल, प्राचीन और मध्यकाल, भक्तिकाल तथा अंततः मुगल साम्राज्य के पतन के उपरांत 18वीं-19वीं सदी में राजा राममोहन राय, दयानंद सरस्वती एवं स्वामी विवेकानंद के कार्य एवं अवदान तक को समेटा है। प्रायः सात हजार वर्षों के लंबे कालखंड के भारतीय इतिहास, संस्कृति, सभ्यता, इतिहास तथा अध्यात्म के इस विशद विमर्श के क्रम में लेखक ने विश्व के सर्वाधिक दिव्य, भव्य, दीप्त और परंपरा से सिक्त, सबसे सुंदर एवं व्यवस्थित एवं प्रथम धर्म, सनातन धर्म के विश्व सभ्यता पर पड़े प्रभाव और अवदान को भी बड़ी गहराई से रेखांकित किया है। अवश्य पठनीय पुस्तक।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| ISBN | |
| Binding | Paperback |
| Pages | |
| Language | Hindi |
| Publishing Year | 2023 |
| Pulisher |











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