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Description
संस्मरण सीकर
दो शब्द
मैं जब कश्मीर विश्वविद्यालय श्रीनगर के हिन्दी विभाग में आचार्य एवं अध्यक्ष के पद पर था, तब विश्वविद्यालय के कुलाधिपति तथा जम्मू-कश्मीर राज्य के राज्यपाल महामहिम श्री भगवान सहाय आई॰सी०एस० थे। वे मेरे पिताश्री स्वर्गीय पं. श्रीराम के मित्र एवं प्रशंसक थे। अतः मैं लगभग प्रतिमास उनसे मिला करता था।
‘संस्मरण सीकर’ की पाण्डुलिपि मैंने उन्हें पढ़ने के लिए दी थी और आग्रह किया था कि वे इसकी भूमिका लिखने का कष्ट करें। उन्होंने कृपापूर्वक मेरा आग्रह स्वीकार कर लिया था और यह भी कहा था कि वे स्वयं इसका प्रकाशन करवाएँगे। कार्यधिक्य तथा राजनीतिक उथल-पुथल के कारण पाण्डुलिपि उनके पास पड़ी रही और राज्यपाल के पदभार से मुक्त होकर जब वे नई दिल्ली (साउथ एक्सटेंशन भाग-2) चलें गये तो उसे अपने साथ ले गये।
1985 में महामहिम से सम्पर्क करके मैं भूमिका (जो उन्होंने 1973 में ही लिख ली थी) और पाण्डुलिपि ले आया और सोचा कि रिटायर होने के बाद पुस्तक प्रकाशित कराऊँगा। कश्मीर में बहुत-सी सम्पत्ति छोड़कर 1986 में रिटायर होकर अपने घर वापस आ गया-पाण्डुलिपि श्रीनगर में ही थी। फिर वहाँ आतंकवाद का प्रकोप हो गया। अन्ततोगत्वा किसी प्रकार 1993 में वह हाथ लग सकी, यद्यपि मेरी अधिकांश सम्पत्ति श्रीनगर में ही लुट गई अथवा भस्म कर दी गई। पिताश्री की जन्म शताब्दी (23 मार्च, 1996) के अवसर पर भाई सुखपालजी गुप्त (आर्य बुक डिपो) की सहायता से यह दुर्लभ ग्रन्थ प्रकाशित हो रहा है। इसमें मेरे स्वर्गीय पिताश्री के दीर्घ संघर्ष पूर्ण जीवन के विविध-आयामी तथा रोचक संस्मरण संगृहीत हैं। शिकार साहित्य, रेखाचित्र, संस्मरण तथा भेंट-वार्ता के हिन्दी में जन्मदाता स्वर्गीय पं० श्रीराम शर्मा (सम्पादक, विशाल भारत) की जन्म शताब्दी के अवसर पर हिन्दी के सुधी पाठकों को यह अमूल्य भेंट देने के लिए मैं आर्य बुक डिपो के प्रबुद्ध संचालकों के प्रति हार्दिक आभार प्रकट करता हूँ क्योंकि उन्होंने पिताश्री के सम्पूर्ण साहित्य को पुनः प्रकाशित करने का उत्तरदायित्व सँभाला है। शुभमस्तु।
रमेश कुमार शर्मा
ब्राह्मण गली, गोकुलपुरा
आगरा-282002
क्रम
- जीवन-संघर्ष का प्रारंभ
- पिताजी की अस्थियों का विसर्जन
- कठमुल्लापन
- नवलगढ़ (राजस्थान) की नौकरी
- हैडमास्टरशिप से इस्तैफा
- ‘हिन्दू संसार’ मानहानि-केस
- स्वर्गीय आसामी बाबू
- हत्या का षड्यंत्र
- मानसिंह का डाकूदल
- संघर्ष और परीक्षा
- आतिथ्य-अवतार पं० मुक्ताप्रसाद चतुर्वेदी
- ठाकुर झंडूसिंह
- ठाकुर नारायणसिंह
- डाकू बीरे से भेंट
- तुलासिंह
- दिशाशूल
- डकैत यदुनाथसिंह-सहृदय और उदार
- दुर्घटनाएँ
- एक अलिखित अध्याय
- पर्ल बक दम्पत्ति से भेंट
- स्वर्गीय मोहनलाल
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2023 |
| Pulisher |











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