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Description
स्त्री देह से आगे
मां, बहन, पत्नी, पुत्री सभी रूपों में स्त्री की दिव्यता नित्य है, रौद्र रूप भी उतना ही विध्वंसक है। आज हर नारी के हृदय में प्रतिष्ठित यह दिव्यता शिक्षा और संचार माध्यमों के आवरण में खो गई है। लेखक ने प्राचीन वाङ्मय के दृष्टांतों से वैज्ञानिक विवेचना कर इन आवरणों को विस्तार से खोला है। स्त्री का दिव्यता पर पड़ी पाश्चात्य जीवनशैली और दर्शन की धूल को लेखक झाड़ता है। स्त्री किसी देश का उत्थान और पतन करने में एकमात्र उपादान है। पुस्तक से हमारी चेतना ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता’ के उद्घोष को जीवन अनुभूत कर सकेगी। गुलाब कोठारी वेद विज्ञान के अध्येता, राजस्थान पत्रिका समूह के प्रधान सम्पादक हैं। उनके लेखन में वेद-उपनिषद्-गीता उद्धृत हैं, मन्त्र हैं तो व्यवहार जगत भी है। नई पीढ़ी को इस ज्ञान से जोड़ने के लिए पिछले चार दशक से भारतीय वाङ्मय की वैज्ञानिकता को प्रमाणित करने को कटिबद्ध हैं। मानस, गीता विज्ञान उपनिषद्, वेद विज्ञान उपनिषद्, मैं ही राधा मैं ही कृष्ण, ब्रह्म विवर्त उनकी चिन्तन धारा की कतिपय प्रतिनिधि रचनाएं हैं।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2025 |
| Pulisher |











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