Swasti Rigved (Pratham Mandal) Se 112 Sukt

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Swasti Rigved (Pratham Mandal) Se 112 Sukt

Swasti Rigved (Pratham Mandal) Se 112 Sukt

649.00 490.00

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Author: Mukund Laath

Availability: 5 in stock

Pages: 486

Year: 2025

Binding: Paperback

ISBN: 9789362017529

Language: Hindi

Publisher: Setu Prakashan

Description

स्वस्ति ऋग्वेद (प्रथम मण्डल) से ११२ सूक्त

इताली काल्वीनो ने कभी लिखा था कि क्लॅसिक वे ग्रन्य होते हैं जिनका जिक्र सभी करते हैं पर जिन्हें पढ़ता कोई नहीं है। यह बात हमारे एक क्लैसिक ऋग्वेद पर बखूबी लागू होती है। इधर ऐसे लोगों और संस्थाओं की संख्या बढ़ी है जो वैदिक ज्ञान, वैदिक सम्पदा, वैदिक परम्परा, वैदिक गणित आदि का जिक्र बहुत करते हैं लेकिन जिन्होंने कभी वेद पढ़े नहीं हैं। एक और लोकप्रिय मिथक यह भी है कि वेदों में सब कुछ है, कि सब कुछ वेदों से ही शुरू हुआ है और उसी में समाहित है। कुछ अनुष्ठानों आदि को भी जब-तब उनकी वैधता और प्रामाणिकता के लिए वेदों से जोड़ा जाता है। हालाँकि आदिकवि हमारे यहाँ वाल्मीकि को माना जाता है; वैदिक ऋषि, जिनमें कई ऋषिकाएँ और सम्भवतः आदिवासी ऋषि भी शामिल हैं. हमारे आदिकवि हैं क्योंकि वेद हमारा प्रथम काव्यग्रन्च है। इसका ताता प्रमाण यह है कि ऋग्वेद के प्रथम मण्डल के ११२ सूक्तों का कवि-विद्वान् मुकुन्द लाड द्वारा किया गया हिन्दी अनुवाद ‘स्वस्ति’ शीर्षक से रजा पुस्तक माला के अन्तर्गत सेतु प्रकाशन प्रकाशित कर रहा है। ऋग्वेद में स्तुति, आह्वान, आद्य-बिम्व आदि कविता के अनेक रूप है। लगता है कि यह कविता देवताओं और प्रकृति के पंच तत्वों से, ज्ञात-अज्ञात शक्तियों से समीपता, सहचारिता और सान्निध्य की कोशिश में लगी कविता है।

यह अलक्षित नहीं किया जा सकता कि एक वैदिक कवि विधाता से कहता है कि ‘यह जगत् काव्य है ‘तुम्हारा’। इस काव्य में पवित्रता और पदार्थमयता, पारलौकिकता और इहलौकिकता का, प्राकृतिक और दिव्य का जो संगुम्फन है वह उसे जो ऊँचाई और उज्यलता देता है वे अपनी ऊष्मा और आशय में बेहद मानवीय है। उसमें ‘प्रचमता’ का आत्मविश्वास और परिष्कार की निष्कलंक आभा दोनों साथ हैं। रजा फाउण्डेशन इस अनुवाद को प्रस्तुत करते हुए कृतज्ञता अनुभव करता है।

— अशोक वाजपेयी

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Binding

Paperback

Language

Hindi

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Publishing Year

2025

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