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उनके हस्ताक्षर
एक लम्बा रास्ता गुजर गया, जब एक उपन्यास लिखा था, डॉक्टर देव। अब चालीस साल के बाद जब मैंने उसे फिर से देखा, लगा-उसका हिन्दी अनुवाद अच्छा नहीं हुआ है। मन में आया, अगर उसका अनुवाद मैं अब स्वयं करूँ, तो उसकी रगो में कुछ धड़कने लगेगा और यही जब करने लगी, तो बहुत कुछ बदल गया। इसी तरह एक मुद्दत हो गई, एक उपन्यास लिखा था…’घोंसला’। प्रकाशित हुआ तो बाद में किफायती संस्करण ‘नीना’ नाम से चलता रहा। आज उसे देखकर लगा कि वह उस कदर पुख्ता नहीं हो पाया था, जो होना चाहिए था और उसी को अब फिर से लिखा है, जिससे वह सघन भी हो पाया है और पुख्ता भी। इसी तरह कभी एक कहानी लिखी थी ‘पाँच बहनें-और उस कहानी को लेकर जब किसी ने फिल्म बनाने की बात की, तो मैंने कहानी को फिर से देखा। अहसास हुआ कि इस जमीन पर जो कहा जा सकता था, वह कहानी में नहीं उतर पाया था। यह अहसास कुछ इस तरह मेरा पीछा करने लगा कि एक दिन मुझे पकड़कर बैठ गया। कुछ और मसले भी थे, जो कहानी में नहीं आ पाए थे। और उन सबको लेकर पाँच की जगह सात श्रेणियों के किरदार सामने रखे और उन सबको कागज़ पर उतार दिया। अब उसे नाम दिया है – उनके हस्ताक्षर।
– अमृता प्रीतम
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2014 |
| Pulisher |











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