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Description
वे जीते कैसे हैं
प्रकाशकीय
इस पुस्तक में हिन्दी के सुप्रसिद्ध लेखक पं० श्रीराम शर्मा की कुछ चुनी हुई रचनाएं संग्रहीत की गई हैं। पाठक जानते हैं कि संस्मरण एवं रेखाचित्र लिखने में हिन्दी के जिन लेखकों को कमाल हासिल है, उनमें शर्माजी की गणना होती है। शिकार-साहित्य में तो उनका बेजोड़ स्थान है। अपने शिकार-संबंधी लेखों में उन्होंने पशु-पक्षियों के बड़े ही सजीव एवं ज्ञानवर्द्धक चित्र उपस्थित किये हैं।
प्रस्तुत पुस्तक में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया है कि पाठकों को विविध रसों की सामग्री मिल जाए। एक ओर उन्हें हृदयस्पर्शी संस्मरण पढ़ने को मिलेंगे तो दूसरी ओर भावपूर्ण रेखाचित्र। शिकार-विषयक लेखों को पढ़कर तो पाठकों को ऐसा अनुभव होगा, मानो वे किसी नए लोक में पहुंच गये हैं।
हमें विश्वास है कि पाठकों को यह पुस्तक पसंद आएगी और वे इसे अधिक-से-अधिक हाथों में पहुंचाने में सहायक होंगे।
विषय-सूची
- स्मृति
- बोलती प्रतिमा
- मौत के मुंह में
- दीनबंधु के अंतिम दिन
- तमाखू लाओ
- सड़क का एक दृश्य
- स्वर्गीय आसामीबाबू
- चंदा
- पीतांबर
- बया : अद्भुत
- स्व० रफी अहमद क़िदवई
- तीन परिचय
- नयना : सितमगर
- स्व० राजबहादुर रुक्मांगदसिंह
- इदन्नमम
- काला हिरन : द्रुतगामी
- स्व० कुंवरसाहब
- लड़की का पिता
- दो पड़ोसी
- वे जीते कैसे हैं ?
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2023 |
| Pulisher |











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