Pardeshiram Verma
परदेशीराम वर्मा
जन्म : 18 जुलाई 1947; छत्तीसगढ़ के गाँव लिमतरा में।
शिक्षा : एम.ए. हिन्दी, लोक प्रशासन, समाजशास्त्र। पण्डित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय द्वारा मानद डी.लिट्. 2003 में।
आप भूतपूर्व सैनिक रहे।
प्रमुख प्रकाशन : आठ कथा-संग्रह, तीन उपन्यास, छह नवसाक्षर साहित्य की पुस्तकें, दस संस्मरण की किताबें, एक नाटक, एक बालकाव्य-संग्रह, एक बालकथा-संग्रह, तीन जीवनी, छत्तीसगढ़ पर केन्द्रित चार वैचारिक पुस्तकें, छत्तीसगढ़ी कहानियों के दो संकलन, सुरंग के उस पार (आत्मकथा), चन्दन पेड़ पहाड़ (पर्यटन), छत्तीसगढ़ की लोककथाएँ।
अनुवाद : कहानियाँ तमिल, मलयालम, बांग्ला में अनूदित। छत्तीसगढ़ी उपन्यास आवा का अंग्रेज़ी में अनुवाद प्रेमचन्द की कहानियों का छत्तीसगढ़ी अनुवाद-अगासदिया प्रेमचन्द।
विशेष : छत्तीसगढ़ी कहानी ‘मरिया’ दसवीं के पाठ्यक्रम में, आवा पण्डित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के एम.ए. पूर्व पाठ्यक्रम में विगत बीस वर्षों से सम्मिलित।
प्रसारण : रायपुर दूरदर्शन के लिए लिखित दो सीरियलों का प्रसारण।
सम्मान : छत्तीसगढ़ी कहानी ‘हमला तय झन भरमा जी’ पुरस्कृत; भारत के राष्ट्रपति के हाथों साहित्य-साधना के लिए छत्तीसगढ़ राज्य शासन का ‘शीर्ष साहित्यिक सम्मान’; ‘पण्डित सुन्दरलाल शर्मा राज्य अलंकरण’ पण्डित रविशंकर विश्वविद्यालय द्वारा ‘बख्शी साधना सम्मान’; उपन्यास प्रस्थान को प्रथम ‘महन्त अस्मिता सम्मान’; जीवनी आरूग फूल को म.प्र. शासन के संस्कृति विभाग का ‘सप्रे पुरस्कार’; ‘अखिल भारतीय प्रेमचन्द सम्मान’; साहित्य-साधना के लिए ‘छत्तीसगढ़ प्राइड अवार्ड’; कथा-संग्रह फ़ैसला के लिए राँची का ‘स्पेनिन पुरस्कार’; हिन्दी की पाँच कहानियों को ‘अखिल भारतीय पुरस्कार’, कथा-लेखन के लिए दुबई में ‘अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी सेवा सम्मान’; दुष्यन्त स्मारक, भोपाल, मध्य प्रदेश का ‘अखिल भारतीय लोक भाषा सम्मान’; 2024 में (असम के छत्तीसगढ़ियों के सन्दर्भ में लेखन के लिए) छत्तीसगढ़ के विधान सभाध्यक्ष द्वारा सम्मान।
साहित्य अकादेमी, नयी दिल्ली द्वारा शताब्दी की कालजयी कहानियों का चयन किया गया है। चयनित कहानियाँ 4 खण्डों में प्रकाशित हुई हैं। विगत सौ वर्षों से कथा-लेखकों में छत्तीसगढ़ के गाँव लिमतरा से निकले परदेशीराम वर्मा के महत्त्व को साहित्य अकादेमी ने आँका है। इस चयन में वाणी प्रकाशन से प्रकाशित प्रथम कथा-संग्रह ‘दिन-प्रतिदिन’ की ‘प्रतिनिधि’ कहानी को डॉ. परदेशीराम वर्मा की कालजयी कहानी का सम्मान मिला है। हिन्दी एवं छत्तीसगढ़ी में लिखित उनके उपन्यास बेहद चर्चित हैं।




