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Description
आदिकालीन साहित्य : पुनःपाठ
हिन्दी साहित्येतिहास के आदिकाल की समय सीमा के अन्तर्गत प्रचुर साहित्य प्रकाशित हो चुका है। अतः उसका सम्यक् अनुशीलन करके उसके सांस्कृतिक, सामाजिक तथा साहित्यिक वैशिष्ट्य का उद्घाटन और मूल्यांकन अपेक्षित है। इसी आवश्यकता की पूर्ति के लिए इस पुस्तक की रचना की गयी है। आदिकाल में धार्मिक रचनाओं के द्वारा मूल्यों, आदर्शों की स्थापना हुई है। धर्म-प्रवणता भारतीय साहित्य की प्रमुख विशेषता रही है। आदिकाल में संस्कृत, प्राकृत, अपभ्रंश तथा अवहट्ठ भाषाओं के साहित्य के साथ पुरानी हिन्दी बोलियों का साहित्य युगानुकूल नूतन लोक चेतना के उन्मेष के अनुक्रम में क्रान्तिकारी परिवर्तन की शक्ति से सम्पन्न हो रहा है। इस काल में अनेक ऐसे भावों, काव्यरूपों, भाषिक शैलियों तथा छन्दों आदि का नूतन प्रवर्तन हुआ है जिनका गहरा प्रभाव मध्यकालीन साहित्य पर है। इस पुस्तक में सम्पूर्ण धार्मिक एवं लौकिक साहित्य का विवेचन तथा मूल्यांकन बिना किसी पूर्वाग्रह के निष्पक्ष भाव से करने का प्रयास किया गया है।
हिन्दी साहित्य के आदिकाल की पूर्व सीमा का निर्धारण हिन्दी भाषा की उत्पत्ति तथा विकास के साथ अभिन्न रूप से जुड़ा हुआ है। इस काल में साहित्यिक अपभ्रंश तथा लोकभाषा में ढलती अपभ्रंश-काव्यभाषा के दो रूप स्पष्ट परिलक्षित होते हैं। साहित्य के इतिहास लेखकों में गुलेरी जी, राहुल सांकृत्यायन तथा रामचन्द्र शुक्ल ने अपभ्रंश को पुरानी हिन्दी या प्राकृतभास हिन्दी माना है। गुलेरी जी का मत है कि, “अपभ्रंश कहाँ समाप्त होती है और पुरानी हिन्दी कहाँ आरम्भ होती है। इसका निर्णय करना कठिन किन्तु रोचक और बड़े महत्त्व का है। इन दो भाषाओं के समय और देश के विषय में कोई स्पष्ट रेखा नहीं खींची जा सकती है। कुछ उदाहरण ऐसे हैं जिन्हें अपभ्रंश भी कह सकते हैं और पुरानी हिन्दी भी।” काशीप्रसाद जायसवाल ने नि:संकोच रूप से अपभ्रंश को पुरानी हिन्दी माना “काव्यगत भाषा अपभ्रंश प्राकृत से दूर और हिन्दी व्याकरण के निकट है। अतः उसे पुरानी हिन्दी कहने में हमें संकोच नहीं होता।” राहुल जी अपभ्रंश और हिन्दी में तद्भव और तत्सम शब्दों के प्रयोग बाहुल्य के अलावा कोई तात्विक भेद नहीं स्वीकार करते। राहुल जी के इस कथन में प्राकृत से सीधे हिन्दी के विकास की धारणा अन्तर्निहित है।
– इसी पुस्तक से
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2025 |
| Pulisher |











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