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Anuvad Ka Naya Vimarsh
₹400.00 ₹340.00



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Author: Shrinarayan Sameer
Pages: 142
Year: 2020
Binding: Hardbound
ISBN: 9788194364832
Language: Hindi
Publisher: Lokbharti Prakashan
अनुवाद का नया विमर्श
प्रस्तुत पुस्तक अनुवाद को विशुद्ध भाषा संवाद मानने की प्रचलित मान्यता से प्रस्थान का विमर्श है। यह अनुवाद को दो भाषाभाषी समाजों और सभ्यताओं में भाषिक अपरिचय के बरअक्स परिचय एवं संवाद का सेतु मानने, विकास की दौड़ में पिछड़े समाजों की आवाज़ मानने और सभ्यता संवाद मानने का तार्किक घोषणापत्र है। इसमें अनुवाद को किसी भाषा रचना की दूसरी भाषा में पुनर्रचना मानने और इस तरह उसे रचना का अनश्वर उद्यम मानने की मुकम्मल तर्क-रचना भी है। इस विमर्श में अनुवाद को सृजन का अनुसृजन बनाने की संस्तुति और तर्क का ताप यत्र-तत्र-सर्वत्र है। इस पुस्तक को पढ़ना समय के संघात से रू-बरू होना और अनुवाद के वैभव को समग्रता में समझना है। साथ ही भूमंडलीकरण, सूचना विस्फोट और बाज़ारवाद के दौर में मानवीय आकांक्षा, भाषा एवं राजनीति के रिश्ते तथा सरोकार को समझना और अपनी पक्षधरता को बेबाक व तलस्पर्शी बनाना भी है।
प्रशासनिक तथा तकनीकी अनुवाद को सरल, सहज एवं सर्जनात्मक बनाने के लिए जिरह करती यह पुस्तक, अपने तर्क एवं विमर्श से अनुवादवेत्ताओं, विशेषज्ञों और सुधि अध्येताओं के बीच समान रूप से समादृत होगी।
| Authors | |
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| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2020 |
| Pulisher |
श्रीनारायण समीर
जन्म : 21 मई, 1959 को महात्मा गांधी के सत्याग्रह आन्दोलन की जन्मस्थली चम्पारण (बिहार) के एक छोटे से गाँव सागर चुरामन में।
शिक्षा : प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा गाँव के ही स्कूल में। बिहार विश्वविद्यालय, मुज़फ़्फ़रपुर से हिन्दी में बी.ए. (ऑनर्स) तथा एम.ए. की उपाधि। बेंगलूर विश्वविद्यालय से ‘अनुवाद : सिद्धान्त और सृजन’ पर पीएच.डी.।
कोयला नगरी धनबाद में पत्रकारिता से जीवन की शुरुआत। राँची विश्वविद्यालय के पी.के. रॉय मेमोरियल पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में सात वर्षों तक अध्यापन। हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड के सेवाकाल में ओडिशा के आदिवासी-बहुल सुन्दरगढ़ ज़िले में हिन्दी माध्यम से वयस्क शिक्षा अभियान के लिए प्रशस्ति।

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