

Bahubhaashikata Aur Bahusaanskritikata

Bahubhaashikata Aur Bahusaanskritikata
₹795.00 ₹565.00
₹795.00 ₹565.00
Author: Prabhakaran Hebbar Illath
Pages: 184
Year: 2026
Binding: Hardbound
ISBN: 9789377377083
Language: Hindi
Publisher: Rajkamal Prakashan
- Description
- Additional information
- Reviews (0)
Description
बहुभाषिकता और बहुसांस्कृतिकता
भाषा एक सर्जनशील शक्ति है। भाषा एक ऐसा तत्त्व है जिसके ज़रिये मानव अपनी उन्नत सांस्कृतिक जीवन-यात्रा को सम्भव बनाता है। यह यात्रा मातृभाषा के माध्यम से सुरुचिपूर्ण ढंग से सम्भव होती है। वह चिन्तन-मनन, भाव-संवर्धन और कल्पनात्मक अभिव्यक्ति के साधन, सर्जनात्मक ऊर्जा और इच्छा-शक्ति के रूप में मानव-जीवन में सक्रिय रहती है। यही सक्रियता मानव-जीवन का सौन्दर्यात्मक विधान है। सूक्ष्म रूप में मानव का भाषिक कार्य मानव की चेतना और बाह्य प्रकृति के साथ किए जाने वाले संवाद का सुष्ठु रूप है। उसमें उसके सामाजिक जीवन के विभिन्न नज़ारे व मानवीय सम्बन्धों के विपुल संजाल प्रतिबिम्बित होते हैं।
भाषा से जुड़कर मनुष्य अपने अनुभव के बल पर इतिहास का निर्माण करता है और संस्कृति को समृद्ध करता है। संस्कृति उन्नत विचारों से परिचालित ज़िन्दगी या उत्कृष्ट मानवीय व्यवहारों का समुच्चय है। वह जीवन की उदात्तता को प्रमाणित करने वाला शब्द है और वह सर्जनात्मक संसाधन है, जिसका संवहन-संक्रमण-हस्तान्तरण भाषा करती है। इस नज़रिए से संस्कृति का विन्यास मानव की सौन्दर्यात्मक भाषा का विन्यास है जिसको मानव के सत्त्व के विकास के रूप में देखा जा सकता है। भाषा और संस्कृति की इस पारस्परिकता को, यह पुस्तक बहुभाषिक और बहुसांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य में विचारोत्तेजक ढंग से प्रस्तुत करती है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2026 |
| Pulisher |









Reviews
There are no reviews yet.