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Beesavi Shatabdi Ka Hindi Natak Aur Rangmunch
₹280.00 ₹225.00



₹280.00 ₹225.00
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Author: Girish Rastogi
Pages: 276
Year: 2020
Binding: Paperback
ISBN: 9788126310814
Language: Hindi
Publisher: Bhartiya Jnanpith
बींसवी शताब्दी का हिन्दी नाटक और रंगमंच
बीसवीं शताब्दी का हिन्दी रंगमंच अनेक हलचलों, आन्दोलनों और अन्वेषणजन्य नये-नये प्रयोगों से भरा हुआ है। यह इतना बृहद् और विविधता लिये है कि पूरी शताब्दी के नाटक और रंगमंच दोनों का समग्र आकलन एक चुनौती बन गया है। लेखिका ने रंगकर्म के अनुभवों, साहित्य और रंगमंच के आन्तरिक सम्बन्धों की सूक्ष्म समझ और नाट्यालोचन की व्यापक दृष्टि के साथ बीसवीं शताब्दी की नाट्य-उपलब्धियों और अन्तविरोधों को एक साथ जाँचा-परखा है। प्रसिद्ध नाट्यचिन्तक और रंगकर्मी गिरीश रस्तोगी की प्रस्तुत कृति ‘बीसवीं शताब्दी का हिन्दी नाटक और रंगमंच’ एक स्पष्ट, सन्तुलित, प्रखर नाट्य-दृष्टि के साथ सर्जनात्मक समीक्षा का श्रेष्ठ उदाहरण है। यह कृति निस्सन्देह, हिन्दी नाटक और रंगमंच के प्रेमियों और शोधकर्ताओं की अपेक्षाओं को पूरा करती है।
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| Binding | Paperback |
| Language | Hindi |
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| Publishing Year | 2020 |
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गिरीश रस्तोगी
गिरीश रस्तोगी (1935-2015) हिंदी की प्रतिष्ठित नाट्यालोचक, नाटककार और रंगकर्मी। गोरखपुर विश्वविद्यालय की सेवानिवृत्त प्रोफ़ेसर और हिन्दी विभागाध्यक्ष। डेढ़ दर्जन से भी अधिक प्रकाशित कृतियों में प्रमुख हैं : हिन्दी कहानी : लिद्धांत और विवेचन (1962), मोहन राकेश और उनके नाटक (1976), समकालीन हिन्दी नाटक की संघर्ष चेतना (1990), हिन्दी नाटक और रंगमंच : नई दिशाएँ, नए प्रश्न (1993), रंगभाषा, हिन्दी नाटक का आत्मसंघर्ष, बीसवीं शताब्दी का हिन्दी नाटक और रंगमंच (2004) (आलोचना पुस्तकें) तथा असुरक्षित (1982) और नहुष (1990) (नाटक)। प्रेमचंद, प्रसाद और अन्य हिन्दी कथाकारों की बहुत-सी कहानियों का नाट्य-रूपांतर किया और लगभग पाँच दर्जन नाटकों को मंच, रेडियो अथवा टेलीविजन के लिए निर्देशित किया।

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