Bhartiya Gyan Parampara : Saatatya aur Samvardhan

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Bhartiya Gyan Parampara : Saatatya aur Samvardhan

Bhartiya Gyan Parampara : Saatatya aur Samvardhan

500.00 380.00

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Author: Balram Shukla

Availability: 5 in stock

Pages: 394

Year: 2026

Binding: Paperback

ISBN: 9789373488615

Language: Hindi

Publisher: Vani Prakashan

Description

भारतीय ज्ञान परम्परा : सातत्य और संवर्धन

बलराम शुक्ल के इस ग्रन्थ में भारतीय ज्ञान-परम्परा का भाष्य करते समय कुछ विशिष्ट सूत्रीकरण किये गये हैं। एक जगह यास्क रचित निरुक्त के हवाले से बताया गया है कि इस ज्ञान-परम्परा के तहत कलियुग में ऋषियों के न रहने से तर्क को ही ऋषि की संज्ञा दे दी गयी है।

इसी की तस्दीक़ करते हुए एक दूसरी जगह कहा गया है कि यह परम्परा ‘सोला स्क्रिप्तुरा’ (एक पवित्र ग्रन्थ में ही सारे सत्य निहित हैं) न हो कर ‘फ़्रोनेमा’ (दृष्टिकोण आधारित) है। यह उस सामी आग्रह को नहीं मानती जिसके तहत अपरिवर्तनीय वस्तु को ही प्रामाणिक और शुद्ध माना जाता है। आनन्द कुमारस्वामी सरीखे इस परम्परा के व्याख्याताओं के लिए मिथ ही इतिहास की भूमिका निभाती है। सृष्टि-निर्माण की थियोक्रेटिक डिज़ाइन के विपरीत यह परम्परा मानती है कि हर सृष्टि से पहले एक सृष्टि है। आदि सृष्टि कोई नहीं है। इसमें ईश्वरीय निरंकुशता की कोई जगह नहीं है।

बलराम शुक्ल के मुताबिक़ जिन बातों को अतार्किक माना जाता है, वे भारतीय ज्ञान-परम्परा के लिए दरअसल संसार को समझने की युक्तियाँ हैं। मसलन, पुनर्जन्म को माने बिना संसार की विचित्रता की व्याख्या नहीं हो सकती। इस परम्परा में समय चक्रीय और कल्पीय है। इस नाते आचार्यों, सन्तों, गुरुओं और आध्यात्मिक नायकों के अनुयायियों को सुविधा मिल जाती है कि वे हर युग में उनकी विद्यमानता की कल्पना कर लें। यही कारण है कि शंकराचार्य, कबीर और नानक जैसी हस्तियाँ हर युग में और हर जगह होने की अनुभूति देती हैं। यही कारण है कि शंकर को उनके अपने युग के ही नहीं बल्कि अतीत के विद्वानों से शास्त्रार्थ में भी विजयी बताया जाता है। यह परम्परा इतनी समावेशी है कि सत्रहवीं सदी में महामति प्राणनाथ इस्लाम को भी भारतीय परम्परा में शास्त्रोक्त तरीक़े से शामिल करने का प्रयास करते हुए दिखते हैं। बलराम शुक्ल ने भारतीय भाषा-विश्लेषण के बारे में तो इस कृति में कमाल ही कर दिया है। लेखन और वाचिकता का सम्बन्ध, लिपि और वाचिकता का सम्बन्ध और भर्तृहरि जैसे जटिल शास्त्र को सरलता से समझा सकने वाला अनूठापन इसकी विशेषता है।

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Binding

Paperback

ISBN

Language

Hindi

Pages

Publishing Year

2026

Pulisher

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