Bhumandalikaran Aur Samkalin Kavita Ka Yatharth

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Bhumandalikaran Aur Samkalin Kavita Ka Yatharth

Bhumandalikaran Aur Samkalin Kavita Ka Yatharth

350.00 300.00

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Author: Dr. Niraj

Availability: 5 in stock

Pages: 152

Year: 2020

Binding: Hardbound

ISBN: 9788194541080

Language: Hindi

Publisher: Aman Prakashan

Description

भूमंडलीकरण और समकालीन कविता का यथार्थ

इस पुस्तक को संपादित करने का सर्वमहत्त्वपूर्ण कारण भूमंडलीकरण के साथ समकालीन हिन्दी कविता के सम्बन्धों को परखने की है। समकालीन हिन्दी कविता और भूमंडलीकरण का मूल्यांकन करते समय लगभग आलोचकों ने भूमंडलीकरण के नाम पर सिर्फ बाजार के विरोध को ही कविता और समकालीनता का उद्देश्य बना दिया है। बाजार के विरोध के अलावा दूसरे स्वर जैसे कि स्थानीयता का, संबंधहीनता का, राष्ट्र-राज्य के बहाने राजनीतिक अस्मिताओं का, पर्यावरण का, सांप्रदायिकता का जैसे अनेक अतिरिक्त चीजों की माया का चित्रण, वर्णन या विश्लेषण कविता में तो है लेकिन आलोचना से वह गायब है।

संभव है यह पुस्तक भी सैद्धांतिक आलोचना के विकास की दृष्टि से एक मुकम्मल पाठ आपको न लगे। लेकिन यह एक छोटा-सा प्रयास है जहाँ आपको समकालीनता, समकालीन हिन्दी कविता और कविता के साथ भूमंडलीकरण के संबंध से लेकर भूमंडलीकरण के समय की अन्य महत्त्वपूर्ण चिंताओं जैसे कि सांप्रदायिकता, किसानी-समस्या, दलित चेतना, स्त्री-चेतना और आदिवासी समस्याओं पर एक समझ बनाने में कुछ मदद जरूर मिल जायेगी। पुस्तक में ‘धूल और शूल’ दोनों पक्षों को समेटने का न तो मेरा दावा है न ही मेरी इतनी क्षमता है। लेकिन हाँ, इसी बहाने आपसे संवाद बनाने की एक छोटी कोशिश है। उम्मीद है अपने सुझाव एवं आलोचनात्मक हस्तक्षेप से हमें जरूर अवगत कराएँगे।

क्र. सं. शीर्षक लेखक पृष्ठ सं.
1. समकालीनता की बहुआयामिता नीरज 13
2. समकालीनता का प्रश्न और कविता अरुण कमल 19
3. समकालीनता का प्रश्न एवं कविता राजेश जोशी 25
4. समकालीन कविता : पृष्ठभूमि और आधारभूमि शिवकुमार मिश्र 31
5. समकालीन हिन्दी कविता : नई चुनौतियाँ जितेन्द्र श्रीवास्तव 39
6. भूमण्डलीकरण और समकालीन हिन्दी कविता रविभूषण 45
7. भूमण्डलीकरण और कविता रविरंजन कुमार 59
8. वैश्वीकरण के समय में कविता का विश्व लीलाधर जगूड़ी 66
9. आर्थिक नृशंसता के दौर में कविता वी. जी. गोपालकृष्णन 74
10. भूमण्डलीकरण, बाजारवाद और हिन्दी कविता राजेन्द्र उपाध्याय 84
11. समकालीन कविता में सांप्रदायिकता विरोधी स्वर प्रणव कुमार ठाकुर 96
12. समकालीन हिन्दी कविता में किसान प्रेमशंकर पाण्डेय 109
13. समकालीन हिन्दी कविता और दलित-चेतना जयप्रकाश कर्दम 119
14. समकालीन हिन्दी कविता और स्त्री-विमर्श अनामिका 130
15. समकालीन आदिवासी कविता हरिराम मीणा 146

Additional information

Authors

Binding

Hardbound

ISBN

Language

Hindi

Pages

Publishing Year

2020

Pulisher

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