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Description
गायब होता देश
जादुई यथार्थवाद…यह उपन्यास हिन्दी को समृद्ध करता है।
—संजीव
आधुनिक विकास की तमीज़ के हिसाब से रातोंरात गुम हो जाती बस्तियों के बाशिन्दों की दर्दनाक दास्तान…जिन पर काग़ज़ी ख़ज़ाना तो बरसाया गया लेकिन पाँव तले की धरती छीन ली…यह उपन्यास साहित्य में अपनी मुकम्मल जगह बनाएगा, ऐसी मुझे उम्मीद है।
—मैत्रेयी पुष्पा
यह एक प्रेम-कथा भी है और थ्रिलर भी… लगभग कोई पात्र एकआयामी नहीं है, सभी पात्रों के अपने-अपने ग्रे-शेड्स हैं।
—प्रसन्न कुमार चौधरी
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2025 |
| Pulisher |











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