Hindi Upanyas : Stri Ki Taraf Khulti Khidki
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हिन्दी उपन्यास : स्त्री की तरफ खुलती खिड़की
‘कास्ट एंड जेंडर : रीडिंग्स इन इंडियन पॉलिटिक्स’ जैसी महत्वपूर्ण पुस्तक के लेखक मनोरंजन महांति (जन्म 1942) ने सामंतवादी व्यवस्था तथा पूँजीवादी व्यवस्था में स्त्री के अधिकारों पर बात की। उनके अनुसार सामंतवादी व्यवस्था में तो स्त्री के कोई अधिकार थे ही नहीं, पूँजीवादी व्यवस्था में उसे कुछ अधिकार मिले। मसलन शिक्षित होने का, बाहर जाकर पुरुषों जैसे काम करने का, सामाजिक-राजनीतिक जीवन में पुरुषों जैसे काम करने, कलात्मक और वैज्ञानिक कार्यों में भाग लेकर अपनी सृजनशीलता को बढ़ाने का अधिकार इत्यादि।
लेकिन पूँजीवाद में सामंतवाद को बिल्कुल समाप्त करके नहीं आता, बल्कि अपने लाभ के लिए उसकी कई चीजों को बनाए रखता है। खासतौर से परिवार और उसमें स्त्रियों तथा बच्चों के प्रति किये जाने वाले व्यवहार के मामले में। लेकिन पूँजीवाद में एक बहुत ही खराब बात यह होती है कि वह स्त्री को क्रय-विक्रय की वस्तु बना देता है। और हम देखते हैं कि जब से सोवियत संघ का विघटन हुआ है और भूमंडलीकरण की प्रक्रिया तेज हुई है, तब से स्त्रियों को वस्तु बनाने की अमानवीयता बहुत बढ़ गई है। बाजारवाद और उपभोक्तावाद ने स्त्रियों की उन स्वतंत्रताओं और जनतांत्रिक अधिकारों को भी बहुत सीमित कर दिया है, जो उन्हें पूँजीवादी व्यवस्था में प्राप्त हुए थे।
स्त्री की तरफ खुलती खिड़की (हिन्दी-उपन्यास) अपने विशिष्ट रचनात्मक योगदान की वजह से हिन्दी उपन्यास को एक नये अस्मितामूलक आधार पर विकसित कर स्त्री रचनाकारों का उपन्यास के केन्द्र में होने तथा मानवाधिकार को बनाये रखने की प्रक्रिया का अभिनन्दन करने का छोटा-सा प्रयास है। स्त्री की तरफ यह खिड़की दोनों तरफ खुल रही है। खुली है, मानवीय पुकार से हमकदम होकर खुलती रहेगी। इतिहास साक्षी है कि स्त्री पक्षधरता की पहली जोरदार आवाज़ राजा राममोहन राय की उठी थी। साहित्य में (सभी कलाओं में भी) कायान्तरण संभव है। इन पंक्तियों के लेखक के एक प्रश्न के उत्तर में प्रभा खेतान ने कहा था— “प्रेमचन्द एक दूरदर्शी कथाकार थे। अगर मानवीय संवेदना इतनी जबर्दस्त नहीं होती तो वे शायद इतने महान साहित्यकार नहीं होते।” फ्रांस की प्रतिभासम्पन्न आलोचक मैडम डिरेस्टल तो उपन्यास के विकास को स्त्रियों के सम्मान के साथ जोड़कर देखती हैं— उसी समाज में उपन्यास का विकास हो सकता है जहाँ स्त्रियों का सम्मान और सार-संभाल हो।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Hardbound |
| Language | Hindi |
| ISBN | |
| Pages | |
| Publishing Year | 2019 |
| Pulisher |











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