Jagdishchandra Mathur
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Description
जगदीशचन्द्र माथुर
स्वाधीनता के बाद के हिन्दी रंगमंच के एक बहुत महत्त्वपूर्ण नाटककार थे स्व. जगदीशचन्द्र माथुर। हालाँकि उनके नाटकों की पृष्ठभूमि आज के समय की नहीं हैं, उसके बावजूद वो आज के समय से पूरी तरह जुड़ते हैं, आज भी उतने सामयिक और अर्थवान लगते हैं। वर्तमान समय के कई एक महत्त्वपूर्ण और ज्वलन्त सरोकारों को इन नाट्यकृतियों में प्रस्तुत करते हैं। जब मैं आज या वर्तमान शब्दों का इस्तेमाल कर रहा हूँ, उसका तात्पर्य सिर्फ़ 1947 के बाद का भारत ही नहीं, बल्कि 21वीं सदी का मौजूदा समय भी है।
‘कोणार्क’, ‘शारदीया’ और ‘पहला राजा’ का रंगमंच के छात्रों और रंगप्रेमियों के बीच पठन-पाठन होना चाहिए, प्रसार-प्रसार होना चाहिए, युवा रंगनिर्देशकों को अपनी आज की समझ, शैली और परिप्रेक्ष्य में इनके मंचन की सम्भावनाएँ तलाशनी चाहिए, ऐसा मुझे लगता है।
– इसी पुस्तक से
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2025 |
| Pulisher |











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