Katha Aalochana Ek Sanchayita

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Katha Aalochana Ek Sanchayita

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700.00 525.00

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700.00 525.00

Author: Dr. Rajkumar

Availability: 5 in stock

Pages: 312

Year: 2025

Binding: Hardbound

ISBN: 9789348409485

Language: Hindi

Publisher: Nayeekitab Prakashan

Description

कथा आलोचना एक संचयिता

कहानी को प्रायः उपन्यास की तुलना में छोटा काम या छोटी कला माना जाता रहा। बड़ा काम और बड़ी कला तो उपन्यास है। किन्तु श्यामसुन्दरदास यह लिख चुके थे कि ‘कुछ विद्वानों ने यह सिद्धान्त स्थिर किया है कि बड़े-बड़े उपन्यासों की अपेक्षा छोटी-छोटी आख्यायिका लिखना और भी अधिक कठिन काम है। … उपन्यास में तो रचना सम्बन्धी दोष कहीं-कहीं छिप भी जाते हैं, पर आख्यायिका में वे बहुत स्पष्ट दिखायी देते हैं।’ (आख्यायिका या कहानी) प्रकाशचन्द्र गुप्त ने इसीलिए लिख दिया कि ‘ऐसे उपन्यासकार होते हैं जो अच्छी कहानी नहीं लिख सकते और ऐसे कहानीकार भी जो उपन्यास लिखने में असफल होते हैं।’ (कहानी की कला) वस्तुतः कहानी एक स्वतंत्र कला है और उसे उपन्यास के साये में रखकर देखना सही नहीं। साहित्यिक विधाओं के बीच कहानी की जगह खोजने के सिलसिले की शुरुआत श्रीपतराय ने की। वे लिखते हैं, ‘कहानी एक अतिशय कमनीय और सुकोमल कलारूप है-कविता और उपन्यास की अत्यन्त मनोहारी बालिका। … उसका स्वरूप कविता अथवा उपन्यास के स्वरूप से अधिक स्वतंत्र और अनिश्चित है, पर इसी कारण उसका लेखन सरल नहीं कठिन हो जाता है-अच्छी कहानी लिखना बड़ा कठिन काम है और उसकी आलोचना करना कठिनतर।’ (युद्धोत्तर हिन्दी कथा साहित्य) कविता और उपन्यास की इस मनोहारी बालिका को साकार रूप देने का काम किया निर्मल वर्मा ने।

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Authors

Binding

Hardbound

ISBN

Language

Hindi

Pages

Publishing Year

2025

Pulisher

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