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Description
पुरबी बयार
श्रृंगार, रोमांस और विरह के ‘पुरबी’ के रस स्रोत महेन्द्र मिश्र (जन्म 6 मार्च 1888; मृत्यु 26 अक्टूबर 1946) अपने जीवन काल में ही किवदन्ती बन चुके थे। विडम्बना यह कि जाली नोटों के छापने का प्रसंग उनके जीवन से जुड़ गया था। इस सन्दर्भ में इस उपन्यास के दूसरे सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण पात्र आ जुड़े थे गोपीचन्द जासूस, जिनका जीवन और करतब एक अलग ही किंवदन्ती है। बेहतर होता कि उनपर अलग से उपन्यास लिखा जाता। फूलों भरी डाल सी लचकती छम-छम बजती कुछ खिली, कुछ अधखिली आघातें सहती ढेलाबाई का जीवन अपने आप में एक आख्यान है।
‘पुरबी बयार’ में यथाशक्य महेन्द्र मिश्र से जुड़े इनके जीवन प्रसंगों को समेटा गया है। सत्य के गिर्द लताओं की तरह लिपटी अनेक कथाओं-उपकथाओं में कथा अक्सर उलझती रही।
– इसी पुस्तक से
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2023 |
| Pulisher |











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