Rang Kitne Sang Mere (Apne-Apne Pinjare-3)
₹395.00 ₹295.00
- Description
- Additional information
- Reviews (0)
Description
रंग कितने संग मेरे (अपने-अपने पिंजरे-3)
आत्मकथा लिखना अपनी ही भावनाओं को उद्वेलित करना है। अपने ही ज़ख़्मों को कुरेदने जैसा है। जीवन के खुरदरे यथार्थ से रू-ब-रू होना है। ऐसे खुरदरे यथार्थ से, जिसे हममें से अधिकांश याद करना नहीं चाहते। इसलिए कि हमारे अतीत में बेचैनी और अभावों का हिसाब-किताब होता है। हम पीड़ित और शोषित समाज से रहे हैं। उत्पीड़न सहते-सहते बचपन से जवान होते हैं। जैसे गाँव-क़स्बों से नगरों-महानगरों की तरफ़ आते हैं। हमें लगता है कि अब हम जवान हो गये हैं। हम घेटोनुमा गाँव से छुटकारा पाकर शहरों में आ गये हैं। हम उत्पीड़न से बच जायेंगे। ऐसा बहुत-से दलित साथियों का भी मानना रहा है, लेकिन जल्द ही उनका यह भ्रम टूट जाता है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2019 |
| Pulisher |











Reviews
There are no reviews yet.