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Description
रोगनाशक धार्मिक अनुष्ठान
किसी भी कार्य को सफलतापूर्वक उसकी परिणति तक पहुँचाने के लिए उसमें पूरी लगन, क्षमता और निष्ठा आवश्यक होती है; परन्तु कभी-कभी कार्यों में विघ्न आते देखकर, रोग के असाध्य होते हुए, परिवार में दुर्घटनाओं का कुचक्र इत्यादि से व्यक्ति जब निरुत्साहित हो जाता है तो उसे एक सुदृढ़ सम्बल की आवश्यकता पड़ती है। ऐसी परिस्थिति में ‘ईश्वर निष्ठा’ से बलशाली कोई भी आस्था न अब तक हुई है और न कभी होगी।
भगवान् महाकाल मृत्यु के मुख से भी बचाने वाले हैं और पुनः नया जीवन देते हैं। महामृत्युंजय और भगवान् शिव के प्रति आपकी निष्ठा को प्रबल बनाने में एवं उनकी पूजा-प्रार्थना के लिए समुचित स्तोत्रों का संग्रह इस ग्रन्थ में किया गया है। आपने यह पुस्तक खरीद ली तो समझो कि आपके घर से दुर्घटना, रोग, अकारण चिन्ता व दुर्विचार भाग गया।
अकाल मृत्यु वो मरे, जो कर्म करे चाण्डाल का।
काल उसका क्या बिगाड़े, जो भक्त है महाकाल का॥
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Sanskrit & Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2015 |
| Pulisher |











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