

Prem Mein Hi Sambhav Hai Digmbar

Prem Mein Hi Sambhav Hai Digmbar
₹199.00 ₹149.00
₹199.00 ₹149.00
Author: Seema Gupta
Pages: 124
Year: 2025
Binding: Paperback
ISBN: 9789355365590
Language: Hindi
Publisher: Bodhi Prakashan
- Description
- Additional information
- Reviews (0)
Description
प्रेम में ही संभव है दिगम्बर
संपूर्ण स्त्री जगत की पीड़ा
हमारा देश देवियों को पूजने का अभ्यस्त रहा है। ऐसी देवियाँ जिनकी मूर्ति बनाई जा सके, कैलेंडर से काट कर जिसे फ्रेम करवाया जा सके और जो हमेशा चुप रहें। देवियाँ ऐसी ही होती हैं। किसी स्त्री को जीवन काल में देवी पद प्राप्त होना बहुत मुश्किल है; हाँ, नाम के पीछे देवी लगाना फिर भी हो सकता है। मगर महादेवी ? और वह भी प्रचण्ड विद्रोहिणी के लिए ? यह तो असम्भव है। इसी असम्भव को प्राप्त नहीं, छीन लिया था अक्क ने और फिर वह जानी गई अक्क महादेवी के नाम से।
दरअसल हमारे देश में स्त्रियों के दमन के दीर्घ प्रचलन के कारण ही समय-समय पर मीरा, अक्क और ललद्यद जैसी स्त्रियों के रूप में विद्रोह और अध्यात्म का प्रचंड विस्फोट होता रहा है। यह एक सुदीर्घ परम्परा चली आ रही है। इस परम्परा की कड़ी में अनेक आवाजें जुड़ती रही हैं, जुड़ रही हैं। विद्रोह छोटा या बड़ा नहीं होता। हर विद्रोह के पीछे एक दमन होता है और क्या कोई भी दमन छोटा हो सकता है ?
इतनी पंक्तियाँ लिखते हुए ही मन एक अपूर्व ऊर्जा से भर गया है तो अक्क महादेवी को पूरा पढ़ कर सीमा गुप्ता को कैसी धुन चढ़ी होगी यह समझना मुश्किल नहीं है। अक्क महादेवी के मन को समझते हुए स्वयं के मन तक पहुंचने की एक अद्भुत यात्रा सीमा की कविताओं में नज़र आती है। देखिए –
“मिल गए क्या अपने सभी प्रश्नों के उत्तर तुम्हें
क्या चंचल चंद्रमा शिव की जटाओं में
वैसे ही टिका है
उतना ही सुंदर जैसे
दिखाई देता है धरती से आकाश पर ?
क्या मन का स्वामी
अपने मन से पार पा चुका”
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2025 |
| Pulisher |









Reviews
There are no reviews yet.