Anagat Gandhi : Baapoo Se Vaishvik Samvad
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अनागत गांधी : बापू से वैश्विक संवाद
आधुनिक सभ्यता के प्रति ज्ञान-निष्ठा और उसके सम्पोषण में तीन सौ वर्षों से चल रहे राज्य प्रायोजित संगठित प्रयासों ने मानवता को कैच-22 के भँवर में फँसा दिया है। इस पुस्तक में आधुनिकता को ही एकमात्र वरेण्य जीवन-दृष्टि समझने के भ्रम का उन्मोचन करने वाली साभ्यतिक ज्ञानमीमांसा के उपस्थापक के रूप में गांधी को खड़ा किया गया है।
गांधी के समय में आधुनिकता ‘एज ऑफ़ ओवर किल’ में नहीं पहुँची थी। लेकिन, आज हम अतिरेकों और अतिमारकता के युग में जी रहे हैं। अब गांधी के स्वर में आज की आधुनिकता को सम्बोधित करना ही होगा। इसीलिए इस पुस्तक में समकालीन वैश्विक विमर्शों के साथ हिन्द स्वराज का पुनः पाठ भी किया गया है।
यह कृति आधुनिकता द्वारा परोसी जा रही हिंसा के विरुद्ध गांधी को सनातन परम्परा के मूल्यों से पोषित होती आ रही अद्वैत सभ्यता के विमर्शकार के रूप में प्रस्तुत करती है। इस पुस्तक के पृष्ठों पर गांधी अपनी इस भूमिका में सस्यूर, मार्क्स, मैक्स वेबर, हैबरमास, फ़ूको और हरारी जैसे विचारकों के साथ संवाद करते हुए दिखते हैं। आधुनिक से अति-आधुनिक होती जा रही सभ्यता की मौलिक ख़ामियों को उजागर करते हुए आधुनिकता की हिन्द स्वराजी आलोचना को मार्टिन हाइडेगर और हन्ना आरेंट तक विस्तारित किया जाना इस कृति की विशिष्टता है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2026 |
| Pulisher |











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