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Description
मराल
आर्ष-मनीषा के अन्वीक्षक आख्याता श्री कुबेरनाथ राय का, भारतीय ज्ञानपीठ के साथ उनकी सारस्वत साधना के प्रारम्भ से ही, घनिष्ठ सम्बन्ध रहा। उनकी प्रथम कृति ‘प्रिया नीलकण्ठी’ भारतीय ज्ञानपीठ का ही प्रकाशन है। उसके बाद ‘रस-आखेटक’, ‘गन्धमादन’ और ‘निषाद बाँसुरी’ शीर्षक तीन निबन्ध संग्रह ज्ञानपीठ द्वारा ही प्रकाशित हुए। इस श्रृंखला में ‘मराल’ का यह प्रकाशन हमारे लिए लेखक का पंचम स्वर है जोकि दशम मूर्तिदेवी पुरस्कार समारोह के अवसर पर श्रुतदेवी सरस्वती के श्रीचरणों में श्रवण-सुभग उपायन के रूप में समर्पित हो रहा है।
Additional information
| Authors | |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2026 |
| Pulisher |











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