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Marxvad Aur Pragatisheel Sahitya
₹750.00 ₹565.00



₹750.00 ₹565.00
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Author: Ramvilas Sharma
Pages: 442
Year: 2017
Binding: Hardbound
ISBN: 9788170551836
Language: Hindi
Publisher: Vani Prakashan
मार्क्सवाद और प्रगतिशील साहित्य
प्रगतिशील हिन्दी आलोचना का इतिहास डॉ. रामविलास शर्मा के लेखन का इतिहास है। चौथे दशक के उत्तरार्द्ध से अब तक-लगभग 50 वर्षों की लेखन अवधि में रामविलास जी ने मध्यकालीन पद्धति विकसित की है। यह पद्धति अचानक विकसित नहीं हुई है, इसके लिए उन्हें प्रतिगामी भाववाद से यथार्थवाद के लिए लम्बा संघर्ष करना पड़ा है। यह पुस्तक उसी ऐतिहासिक संघर्ष का जीवन्त दस्तावेज़ है।
पुस्तक पढ़ते हुए आप महसूस करेंगे कि इसमें समझौता-परस्त लचीलापन और कठमुल्लावाद से अलग एक यथार्थवादी क्रान्तिकारी दृष्टि है जिसके तहत साहित्य की आलोचना अन्ततः समाज की आलोचना बन जाती है। इसलिए आज साहित्य के नये दौर में मार्क्सवाद और प्रगतिशील साहित्य का प्रकाशन सही दिशा में की गयी एक पहल है।
| Authors | |
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| Binding | Hardbound |
| ISBN | |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2017 |
| Pulisher |
रामविलास शर्मा
जन्म : 10 अक्तूबर, 1912।
जन्म-स्थान : ग्राम : ऊँचगाँव सानी, जिला उन्नाव (उत्तर प्रदेश)।
शिक्षा : 1932 में बी.ए., 1934 में एम.ए. (अंग्रेजी), 1938 में पी-एच.डी. (लखनऊ विश्वविद्यालय)।
देहावसान : 30 मई 2000।
लखनऊ विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग में पाँच वर्ष तक अध्यापन-कार्य किया, सन् 1943 से 1971 तक आगरा के बलवंत राजपूत कॉलेज में अंग्रेजी विभाग के अध्यक्ष रहे। बाद में आगरा विश्वविद्यालय के कुलपति के अनुरोध पर के.एम. हिंदी संस्थान के निदेशक का कार्यभार स्वीकार किया और 1974 में अवकाश लिया। सन् 1949 से 1953 तक रामविलासजी अखिल भारतीय प्रगतिशील लेखक संघ के महामंत्री रहे।

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