Nari Sashaktikaran Ke Aayam Aur Chunotiyan
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नारी सशक्तिकरण के आयाम और चुनौतियाँ
किसी भी कृति या रचना को मूर्त रूप देने वेफ लिए निरन्तर एक थाट-प्रोसेस सोते-जागते चलता रहता है। छोटी आयु से ही, सम्वेदनशील होने के नाते, नारी मेरे चिन्तन के केन्द्र में रही है। नारी जीवन की यातनायें व शोषण मेरे दिमाग में घुमड़ती रही हैं।
मैंने नारी सशक्तीकरण पर काम करना 2008 से आरम्भ किया। निरन्तर उनकी पीड़ा, दुःख, यातना, शोषण, अत्याचार, उत्पीड़न आदि पर सोचता रहा। पुरुषवादी अहम और सोच उसे अनादि काल से दोयम पायदान पर ही रखा। शिक्षा से उसे दूर रखा। परिवार की चारदीवारी ही उसका संसार था। हजारों वर्ष तक वह भोग की वस्तु बनी रही। उसके शारीरिक सौन्दर्य का बलात् शोषण होता रहा। वह गूंगे की तरह सब कुछ सहती रही। आदिम-युग, कृषि युग, सामन्तवादी युग और पूँजीवादी व्यवस्था में भी उबर नहीं पायी। वैश्वीकरण में प्रगति के आयाम सामने आ रहे हैं।
मेरे शोध् का विषय बहुत बड़ा था जिसके लिए मुझे झांसी, हमीरपुर, बांदा और जालौन के सैकड़ों गाँवों में जाना पड़ा। ग्रामीण जीवन को बहुत निकट से देखा। नारी की दयनीय स्थिति से रू-ब-रू हुआ हूँ। शिद्दत से उनके जीवन को महसूस किया है। यह वह समय था जब मुझे नारी पर काम करने की प्रेरणा मिली। संवेदना ने मुझे कवि, लेखक और एक सम्वेदनशील समाजशास्त्राी भी बना दिया। नगर व महानगर की नारी जाति एवं वर्ग संरचना और इसके प्रकार्यात्मक प्रतिमान से परिचित हूँ। इनकी आर्थिक-सामाजिक तथा राजनैतिक स्थिति से अवगत हूँ। इसलिए नारी जीवन की चुनौतियों के आयाम मेरे लेखन के विषय रहे हैं। विषय के रूप में यह पुस्तक में है।
Additional information
| ISBN | |
|---|---|
| Authors | |
| Binding | Hardbound |
| Language | Hindi |
| Pages | |
| Publishing Year | 2021 |
| Pulisher |











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